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कविता : नन्हा खिलाड़ी

कविता : नन्हा खिलाड़ी

-डॉ. प्रियंका सौरभ-

नन्हा बच्चा बैट उठाए,
खेल-खेल में खुश हो जाए।

सड़क बनी उसका मैदान,
दिल में सपनों की उड़ान।

छोटे-छोटे उसके कदम,
मन में है हिम्मत हरदम।

हँसता-गाता खेलता जाए,
सबका मन वह खुश कर जाए।

प्यारी उसकी मीठी हँसी,
जैसे खिले बाग में कली।

आँखों में चमक निराली,
जैसे चमके सुबह की लाली।

नन्हा सा यह प्यारा लाल,
बनेगा बड़ा खिलाड़ी कमाल।

सियासी मियार की रीपोर्ट