राज्यसभा के 37 सांसदों की विदाई पर भावुक हुए पीएम मोदी, अनुभवी नेताओं के समर्पण की सराहना कर कहा- सदन की विरासत और अनुभव देश निर्माण में हमेशा आएंगे काम

नई दिल्ली, 18 मार्च। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में उन 37 सांसदों को भावपूर्ण विदाई दी, जिनका कार्यकाल अप्रैल और जुलाई के बीच पूरा हो रहा है। सदन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह सदन खट्टे-मीठे अनुभवों का संगम है, जहाँ वैचारिक मतभेदों के बावजूद सभी सदस्य एक-दूसरे के प्रति गहरा सम्मान रखते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्यसभा से रिटायर हो रहे सदस्य भले ही सदन से जा रहे हों, लेकिन समाज और राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी और सेवा का सफर अलग-अलग रूपों में जारी रहेगा। प्रधानमंत्री ने इस दौरान सदन की निरंतरता और वरिष्ठ सदस्यों से सीखने की परंपरा को संसदीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बताया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने एचडी देवेगौड़ा, मल्लिकार्जुन खड़गे और शरद पवार जैसे कद्दावर नेताओं के लंबे संसदीय जीवन का विशेष जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन वरिष्ठ सदस्यों ने अपनी आधी से ज्यादा जिंदगी देश की सेवा और विधाई कार्यों में समर्पित कर दी है। पीएम मोदी ने नए सांसदों को सलाह दी कि वे इन अनुभवी नेताओं से सदन के प्रति लगन, अनुशासन और समर्पण की सीख लें। उन्होंने उप-सभापति हरिवंश नारायण सिंह की भूमिका की भी सराहना की और कहा कि सदस्यों की वैचारिक समझ और काबिलियत यहाँ बिताए गए छह वर्षों के अनुभव से कई गुना बढ़ जाती है, जो उनके व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ देश की नीति निर्धारण के लिए भी अमूल्य है।
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि विदा हो रहे सांसद सदन के बाहर भी देश के सार्वजनिक जीवन में अपना बहुमूल्य योगदान देते रहेंगे। उन्होंने कहा कि अनुभव की यह शक्ति किसी भी व्यवस्था का हिस्सा रहे या न रहे, लेकिन राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में हमेशा सहायक सिद्ध होती है। पीएम मोदी ने सभी 10 राज्यों के सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और सदन के कामकाज को बेहतर बनाने में उनके सक्रिय सहयोग को स्वीकार किया। विदाई के इस अवसर पर सदन का माहौल काफी गरिमापूर्ण रहा, जहाँ पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने एक-दूसरे के विधाई योगदान को रेखांकित किया।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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