मिडिल ईस्ट संघर्ष और ऊर्जा संकट वैश्विक चिंता, शांति और संवाद ही समाधानः सुखदेव भगत

मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और ऊर्जा संकट को लेकर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “ऊर्जा संकट केवल भारत तक सीमित नहीं है। इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ने वाला है। बुनियादी ढांचे और कई नागरिक क्षेत्रों में हमले हो रहे हैं। यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय है।
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, लगभग 22 देशों ने स्टेट ऑफ होर्मुज खोलने पर चर्चा की है, जिससे पता चलता है कि यह मुद्दा सिर्फ दो देशों के बीच का नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है। मेरा मानना है कि संवाद और शांति ही एकमात्र रास्ता है। भारत में इस बारे में पहल कर रहा है तो अच्छी बात है।”
कांग्रेस सांसद ने युद्ध को लेकर कहा, “यह सिर्फ ब्रिक्स का मामला नहीं है। मेरा मानना है कि जी 7 से लेकर अन्य सभी प्रमुख देशों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों को भी स्थिति पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, खासकर जहां मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। मेरा मानना है कि युद्ध कभी किसी समस्या का समाधान नहीं होता। संवाद और कूटनीति ही मुद्दों को सुलझाने का एकमात्र तरीका है। भारत हमेशा से शांति का दूत रहा है और उसे पहल करनी चाहिए।”
इसके पहले 19 मार्च को कांग्रेस सांसद ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की इजरायल को धमकी पर कहा था, “युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। भारत हमेशा से संवाद का पक्षधर रहा है। युद्ध न सिर्फ दोनों देशों के अहित में होते हैं, बल्कि अन्य संबंधित देशों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। युद्ध के दौरान धमकियों का कोई अंत नहीं होता है। इसलिए संवाद कायम होना चाहिए।”
अमेरिकी राष्ट्रीय इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड की ओर से पाकिस्तान को अमेरिका के लिए बड़ा परमाणु खतरा बताए जाने पर सुखदेव भगत ने कहा था, “पाकिस्तान हमेशा से आतंकवाद को संरक्षण देता रहा है। भारत शुरू से ही इस बात को दोहराता रहा है। अब अगर अमेरिका भी महसूस कर रहा है तो ये अच्छी बात है। मेरा मानना है कि जो आतंकवाद को संरक्षण दे, वह देश पूरे विश्व के लिए कभी अच्छा नहीं हो सकता है।”
सियासी मियार की रीपोर्ट
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