‘स्वयंभू’ विश्वगुरु की असफलताओं के कारण टूटा हुआ देश ‘ब्रोकर’ राष्ट्र बन गया: कांग्रेस

कांग्रेस ने पश्चिम एशिया संघर्ष में पाकिस्तान की कथित मध्यस्थता के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा दिए गए ‘‘दलाल राष्ट्र’’ के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘‘स्वयंभू विश्वगुरु’’ की कूटनीति और बयानबाजी की विफलताओं ने ‘‘टूटे हुए देश को ‘ब्रोकर’ राष्ट्र में बदल दिया है।’’
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि ‘स्टाइलिश’ और अत्यंत अनुभवी कहे जाने वाले विदेश मंत्री पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को समाप्त कराने के लिए बातचीत में पाकिस्तान के मध्यस्थ एवं पहलकर्ता के रूप में उभरने से भारत को हुई ‘‘भारी शर्मिंदगी और क्षेत्रीय कूटनीति को लगे झटके को ढकने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।’’
रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘यह वास्तव में घोर आपत्तिजनक है कि पाकिस्तान को इस भूमिका के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। पाकिस्तान वही देश है जिसकी सरकारी व्यवस्था ने चार दशकों से अधिक समय तक भारत और अन्य देशों में आतंकवाद को प्रायोजित और संचालित किया है, ओसामा बिन लादेन और अन्य खतरनाक वैश्विक आतंकवादियों को दशकों तक पनाह दी, परमाणु अप्रसार कानूनों का घोर उल्लंघन कर अन्य देशों को परमाणु क्षमता हासिल करने में मदद की।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ (पाकिस्तानी वैज्ञानिक) ए. क्यू. खान नेटवर्क की भूमिका का दस्तावेजों में जिक्र किया गया है और (पाकिस्तान के) तत्कालीन राष्ट्रपति (परवेज) मुशर्रफ ने भी स्वयं इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था।’’
कांग्रेस ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में अस्पतालों और असैन्य ठिकानों पर बेरहमी से बमबारी की और विभिन्न प्रांतों-बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और अन्य क्षेत्रों में अपने ही नागरिकों तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ युद्ध छेड़ा।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को मध्यस्थ की भूमिका के लिए उपयुक्त माना जाना प्रधानमंत्री की उस कूटनीति की वास्तविकता और उसके तौर-तरीके दोनों पर एक बेहद गंभीर प्रश्न है, जो बड़े-बड़े दावों और कायरता से चिह्नित रही है।
उन्होंने कहा कि 26 नवंबर 2008 में हुए मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ गया था क्योंकि डॉ. मनमोहन सिंह की तत्कालीन केंद्र सरकार दुनिया को पाकिस्तान की साजिशपूर्ण भूमिका से अवगत कराने में सफल रही थी।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकवादी हमलों की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ और जहरीले बयानों के बाद भी हम पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करने में असफल रहे। उल्टा, वह (मुनीर) और अधिक प्रासंगिक व्यक्ति के रूप में उभरकर सामने आए और 10 मई 2025 के बाद तो यह साफ हो गया कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर (अमेरिका के) राष्ट्रपति (डोनाल्ड) ट्रंप और उनकी टीम के पसंदीदा बन चुके हैं।’’
रमेश ने कहा, ‘‘विदेश मंत्री ने कल रात कहा कि भारत कोई ‘ब्रोकर’ (दलाल) देश नहीं है। यह अपनी जगह सही बात हो सकती है, लेकिन सच यह है कि हमारी कूटनीति, वैश्विक संपर्क और विमर्श प्रबंधन की भारी विफलताओं ने एक टूटे हुए देश को ‘ब्रोकर’ देश बना दिया है। यही स्वयंभू विश्वगुरु का हमारे कूटनीतिक रिकॉर्ड में एक ऐसा अनोखा योगदान है, जिसे विदेश मंत्री के कितने भी ‘वन लाइनर’ (चुटीले बयान ) मिटा नहीं सकते।’’
सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री ने बुधवार को कहा था कि पश्चिम एशिया मामले में पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों में कुछ भी नया नहीं है क्योंकि 1981 से अमेरिका द्वारा उस देश का ‘‘इस्तेमाल’’ किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार ,जयशंकर ने पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा के लिए संसद परिसर में बुलाई गई बैठक में उपस्थित लोगों से कहा, ‘‘हम दलाल राष्ट्र नहीं हैं।’’
सियासी मियार की रीपोर्ट
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