मजबूत राजकोषीय प्रबंधन की बदौलत पूंजी व्यय, ब्याज कटौती की क्षमता बरकरार है: सीतारमण

नई दिल्ली, 08अप्रैल। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के विकास के लक्ष्य को हासिल करने में राजकोषीय स्थिति की मजबूती के महत्व को रेखांकित करते हुए सोमवार को कहा कि पिछले एक दशक के सुधारों से आज के चुनौतीपूर्ण दौर में भी सरकार के पास पूंजीगत कार्यक्रमों को बनाए रखने और रिजर्व बैंक के पास ब्याज दर में कटौती की गुंजाइश बनी हुई है।
श्रीमती सीतारमण ने आज यहां वित्तीय शोध संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फाइनेंस एंड पॉलिसी के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा ,”यह भी ध्यान देने योग्य है कि एक अच्छी सार्वजनिक वित्त नीति राजकोषीय नीति की प्रतिचक्रीय उतार-चढ़ाव से,—विशेष रूप से आर्थिक मंदी के दौरान विपरीत परिस्थितियों में उसका सामना करने की क्षमता को बढ़ाती है।आज उच्च ऋण और बड़े घाटे वाले कई देशों के पास कोई विकल्प नहीं बचा है तथा उन्हें मितव्ययिता और अस्थिरता के बीच कठिन विकल्प का सामना करना पड़ रहा है। इसके विपरीत भारत में सरकार के पास पूंजीगत व्यय कार्यक्रम को बनाए रखने तथा आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती करने और प्रभावित क्षेत्रों को लक्षित सहायता प्रदान करने की गुंजाइश है। यह एक दशक केराजकोषीय अनुशासन का लाभ है। ”
उन्होंने जोर दिया कि यह राजकोषीय विवेक की रणनीतिक शक्ति है जो दशकों तक लाभ देती है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसी क्षमता की वजह से सरकार वैश्विक संकट कैसे दूर में डीजल एवं पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क कम करने में सक्षम हुए हैं और महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर विशेष छूट दी गई है। उन्होंने सार्वजनिक वित्त के एक ऐसे आयाम को समझा है जिस पर अकादमिक और नीतिगत दोनों ही बहसों में अपर्याप्त ध्यान दिया जाता है वह है सरकार के खर्च करने का समय। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि- न केवल ‘क्या’ खर्च करना है, या ‘कितना’ खर्च करना है, बल्कि ‘कब’ खर्च करना है वह भी बहुत महत्वपूर्ण है।
श्रीमती सीतारमण ने कहा, “सार्वजनिक व्यय का समय निर्धारण स्वयं एक व्यापक आर्थिक उपकरण है – इसे मैं “सामयिक दक्षता” कह सकती हूँ।” उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने अपने बजटीय आवंटनों के लिए ‘जस्ट-इन-टाइम’ रिलीज पर ज़ोर दिया है और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) का पूर्ण उपयोग किया है। उन्होंने कहा कि लोक वित्त प्रबंध प्रमनाली -पीएफएमएस के माध्यम से, केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) के तहत निधियों की रिलीज के लिए एसएनए-स्पर्श मॉडल लागू किया गया है। इसने “क्रेडिट पुश” (विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों को पूर्व-निरंतर निधि रिलीज) से “डेबिट पुल” आधारित निधि हस्तांतरण प्रणाली में परिवर्तन को चिह्नित किया, जिसमें केंद्रीय कोष से डेबिट तभी शुरू होता है जब कार्यान्वयन एजेंसियां सिस्टम पर भुगतान निर्देश जारी करती हैं।
उन्होंने कहा कि एसएनए-स्पर्श की संरचना के अनुसार, यह वास्तविक समय में अंतिम लाभार्थी के खाते में निधि “खींच” सकता है, जिससे राजकोषीय संसाधनों की बचत होती है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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