युद्ध के मैदान में रोबोटिक सेना का ऐतिहासिक उदय

कीव, 21 अप्रैल। यूक्रेन ने आधुनिक युद्ध के इतिहास में एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसने भविष्य की सैन्य रणनीतियों को पूरी तरह बदल दिया है। ‘हथियार निर्माताओं के दिवस’ के अवसर पर राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पुष्टि की है कि यूक्रेनी सेना ने पहली बार बिना किसी पैदल सेना (Infantry) के, केवल जमीनी रोबोट और ड्रोन का उपयोग कर रूस की एक सामरिक चौकी पर कब्जा कर लिया है। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान एक भी यूक्रेनी सैनिक ने जमीन पर पैर नहीं रखा। हमले की तीव्रता और मशीनों के सटीक प्रहार को देख रूसी सैनिकों ने बिना लड़े आत्मसमर्पण कर दिया। जेलेंस्की ने इसे ‘इलाके पर कब्जा’ करने की क्षमता रखने वाले मानवरहित प्लेटफॉर्म्स की सबसे बड़ी जीत बताया है।
इस सफल ऑपरेशन के पीछे ‘कॉम्बैट स्टैक’ नामक एक परतदार रोबोटिक प्रणाली काम कर रही थी। सबसे पहले ‘मैविक’ और ‘ऑटेल’ जैसे टोही ड्रोनों ने आसमान से ‘आंखों’ का काम किया और दुश्मन की हर हलचल पर नजर रखी। इसके बाद ‘रैटल एस’ जैसे आत्मघाती ग्राउंड रोबोट, जो भारी एंटी-टैंक माइंस से लैस थे, उन्होंने बंकरों के दरवाजों को उड़ा दिया। अंत में ‘प्रोटेक्टर’ और ‘वॉल्या’ जैसे शक्तिशाली रोबोटिक वाहनों ने मशीनगनों से मोर्चा संभाला। इन मशीनों ने न केवल हमला किया, बल्कि दुश्मन के इलाके में घुसकर वहां अपनी पकड़ बनाए रखी, जिसके कारण रूसी सैनिकों को कार्डबोर्ड पर ‘सरेंडर’ लिखकर बाहर आना पड़ा।
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, युद्ध के मैदान में रोबोटिक प्लेटफॉर्म की तैनाती में भारी वृद्धि हुई है। नवंबर 2025 में जहाँ 67 रोबोटिक इकाइयां सक्रिय थीं, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 167 हो गई है। जेलेंस्की ने कहा कि सबसे खतरनाक इलाकों में इंसानों के बजाय रोबोट भेजने से अब तक 22,000 से ज्यादा यूक्रेनी सैनिकों की जान बचाई जा चुकी है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, रूसी सेना को फ्रंटलाइन पर हुए 90% नुकसान के लिए ड्रोन ही जिम्मेदार हैं। यह तकनीक न केवल रसद पहुंचाने और घायलों को निकालने में सक्षम है, बल्कि अब सीधे तौर पर दुश्मन को कैदी बनाने और क्षेत्र जीतने में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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