अमेरिका: अक्षय पात्र से प्रेरित पहल का विद्याथियों के बीच खाद्य असुरक्षा की चुनौती से निपटने पर जोर
न्यूयॉर्क, अक्षय पात्र फाउंडेशन से प्रेरित एक वैश्विक खाद्य पहल ने अमेरिका में कॉलेज के विद्यार्थियों के बीच खाद्य असुरक्षा की चुनौती से निपटने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है और भारतीय-अमेरिकी प्रवासी समुदाय से अपना समर्थन देने का आह्वान किया है।
न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने ‘वर्ल्ड फूड मूवमेंट’ (डब्ल्यूएफएम) के सहयोग से सोमवार को यहां ‘नो वन हंगरी’ (कोई भूखा ना रहे) शीर्षक से एक विशेष कार्यक्रम किया। अमेरिका स्थित एक गैर-लाभकारी संगठन डब्ल्यूएफएम ने पिछले साल सितंबर में न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, बोस्टन और कैलिफोर्निया के सामुदायिक कॉलेजों में विद्यार्थियों को गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की पहल शुरू की थी, जिसका लक्ष्य 2030 तक पूरे अमेरिका में सालाना दस लाख थाली परोसना था।
वाणिज्य दूतावास में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अक्षय पात्र फाउंडेशन और डब्ल्यूएफएम के सह-संस्थापक एवं वाइस चेयरमैन श्रीचंचलपति दास ने कहा कि अमेरिका में ऐसा नहीं होना चाहिए कि विभिन्न समुदायों के विद्यार्थियों को भोजन और शिक्षा के बीच चुनाव करने के लिए संघर्ष करना पड़े।
दास ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अमेरिका में कॉलेज परिसरों में लगभग 41 प्रतिशत छात्र खाद्य असुरक्षा का सामना करते हैं। देश के 91 संस्थानों के 74,000 से अधिक छात्रों से जुटाए गए आंकड़े से यह भी पता चला कि संरचनात्मक रूप से वंचित समूहों में से आधे से अधिक छात्र कॉलेज परिसरों में भूखे रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह सब देखकर, यह सब सुनकर, हमने विश्व खाद्य आंदोलन को एक चैरिटी के रूप में स्थापित किया ताकि मुख्य रूप से कॉलेज परिसरों और खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे कुछ समुदायों में खाद्य असुरक्षा को दूर किया जा सके।’’
डब्ल्यूएफएम वर्तमान में न्यूयॉर्क शहर और न्यू जर्सी में तीन-तीन सामुदायिक कॉलेज, बोस्टन के उपनगरों में दो सामुदायिक कॉलेज, बे एरिया में सात सामुदायिक कॉलेज परिसरों को सेवाएं प्रदान करता है और वर्जीनिया में प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को लगभग 1800 थाली भोजन प्रदान करता है यानी कुल मिलाकर प्रति सप्ताह लगभग 3700 थाली।
न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्यदूत विनय प्रधान ने कहा कि ये आंकड़े एक ‘‘बहुत ही महत्वपूर्ण’’ मुद्दे की ओर इशारा करते हैं। पूरे भारत में जरूरतमंद समुदायों की मदद के लिए अमेरिका में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के प्रयासों की सराहना करते हुए, प्रधान ने इस बात पर जोर दिया कि यह ‘‘उचित’’ है कि भारतीय मूल के अमेरिकी भी उन देशों के समुदायों की मदद करें जहां वे रहते हैं।
इस महीने ‘टाइम’ पत्रिका द्वारा दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किये गए शेफ विकास खन्ना ने कहा कि भारत में ‘‘भोजन उपासना, देखभाल और उपचार का एक रूप है’’ और यह लोगों को एक दूसरे से जोड़ता है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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