एकता दिवस पर मणिपुर के लोगों ने दोहराया राज्य की अखंडता की रक्षा का संकल्प

इंफाल, 19 जून। मणिपुर में गुरुवार को ‘ग्रेट जून विद्रोह दिवस’ और ‘एकता दिवस’ की 25वीं वर्षगांठ पर लोगों ने राज्य की अखंडता की रक्षा का संकल्प दोहराया।
केक्रुपाट में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आयोजन समिति के सह-संयोजक सांता नाहाकपम ने कहा कि यदि अलग प्रशासन, ध्वज और संबंधित संवैधानिक व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों का समयबद्ध समाधान नहीं किया गया तो राज्य में 2001 जैसी जन-आंदोलन की स्थिति पैदा हो सकती है।
उन्होंने विभिन्न समुदायों के साथ अलग-अलग शांति वार्ताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे मतभेद और बढ़ सकते हैं। उन्होंने सभी प्रभावित समुदायों की शिकायतों के समाधान और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।
उल्लेखनीय है कि 18 जून 2001 को केंद्र सरकार द्वारा एनएससीएन (आईएम) के साथ संघर्षविराम समझौते में “क्षेत्रीय सीमा के बिना” प्रावधान शामिल किए जाने के विरोध में मणिपुर में व्यापक आंदोलन हुआ था। इस दौरान सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 18 लोगों की मौत हो गई थी।
स्टेट 02
तमिलनाडु विधानसभा का मेकेदाटु बांध परियोजना पर विशेष प्रस्ताव, केंद्र से मंजूरी न देने की मांग
चेन्नई, 19 जून (वेब वार्ता)। कर्नाटक सरकार की प्रस्तावित मेकेदाटु बांध परियोजना के खिलाफ तमिलनाडु विधानसभा में शुक्रवार को एक विशेष प्रस्ताव पेश किया गया। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने सदन में प्रस्ताव रखते हुए केंद्र सरकार से आग्रह किया कि मेकेदाटु बांध निर्माण के लिए किसी भी प्रकार की तकनीकी, प्रशासनिक अथवा पर्यावरणीय मंजूरी प्रदान न की जाए।
तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) सरकार के सत्ता में आने के बाद विधानसभा का पहला सत्र गुरुवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ था। सत्र के दूसरे दिन आज राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा स्थगित कर सरकार का विशेष प्रस्ताव सदन में प्रस्तुत किया गया।
बैठक की शुरुआत पूर्व विधायकों सी. रामासामी, डी. वीरासामी, सी. स्वामीनाथन, एच.जी. आरुमुगम, पी. कन्नन और ए. नंजिल मुरुगेशन के निधन पर शोक प्रस्ताव के साथ हुई। इसके बाद राजस्व मंत्री एवं सदन के नेता के.ए. सेंगोट्टैयन ने विशेष प्रस्ताव को चर्चा के लिए लाने का प्रस्ताव रखा।
मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि कर्नाटक सरकार कावेरी नदी पर मेकेदाटु में बांध निर्माण के लिए एकतरफा प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यह कदम पांच फरवरी 2007 को कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अंतिम निर्णय तथा 16 फरवरी 2018 को उच्चतम न्यायालय के फैसले की भावना के विपरीत है। साथ ही, संबंधित राज्यों की सहमति और केंद्र सरकार की स्वीकृति के बिना इस परियोजना को आगे बढ़ाने का प्रयास स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि कावेरी न्यायाधिकरण और उच्चतम न्यायालय ने कावेरी जलग्रहण क्षेत्र को जल-अभाव वाला क्षेत्र मानते हुए उपलब्ध जल का बंटवारा संबंधित राज्यों के बीच कर दिया है। ऐसे में इस जलग्रहण क्षेत्र में किसी नई परियोजना या अतिरिक्त जल भंडारण योजना को लागू नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कावेरी जल विवाद तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों राज्यों के लिए अत्यंत संवेदनशील विषय है। इसलिए केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करे कि अन्य जलग्रहण राज्यों की सहमति और उसकी अनुमति के बिना मेकेदाटु अथवा कावेरी बेसिन के किसी अन्य हिस्से में कोई नया बांध या जलाशय परियोजना शुरू न की जाए।
विशेष प्रस्ताव में केंद्रीय जल आयोग से भी अनुरोध किया गया कि वह कर्नाटक सरकार द्वारा प्रस्तुत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर विचार न करे, उस पर कोई कार्रवाई न करे और किसी प्रकार की स्वीकृति प्रदान न करे।
सदन ने सर्वसम्मति से यह भी कहा कि मेकेदाटु परियोजना के विरोध और तमिलनाडु के किसानों के हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए सभी कदमों को उसका पूर्ण समर्थन प्राप्त है।
प्रस्ताव पारित करते हुए तमिलनाडु विधानसभा ने केंद्र सरकार से कर्नाटक सरकार की मेकेदाटु बांध परियोजना को किसी भी स्तर पर मंजूरी न देने की मांग दोहराई और कावेरी जल बंटवारे से जुड़े मौजूदा न्यायिक एवं वैधानिक प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
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