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‘डाउनस्ट्रीम’ एल्युमीनियम उद्योगों की सीमा शुल्क कटौती की मांग, मंत्रालय को दिया ज्ञापन

‘डाउनस्ट्रीम’ एल्युमीनियम उद्योगों की सीमा शुल्क कटौती की मांग, मंत्रालय को दिया ज्ञापन

नई दिल्ली, । एल्युमिनियम से तैयार उत्पाद बनाने वाले उद्योगों (डाउनस्ट्रीम) ने केंद्र सरकार से प्राथमिक एल्युमिनियम और एल्युमिनियम कबाड़ यानी स्क्रैप पर सीमा शुल्क कम करने की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा शुल्क व्यवस्था के कारण सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) पर लागत का भारी दबाव पड़ रहा है और उनकी प्रतिस्पर्धी क्षमता प्रभावित हो रही है।

एल्युमिनियम डाउनस्ट्रीम उद्योग से आशय ऐसे उद्योगों से है जो प्राथमिक एल्युमिनियम (इंगट, बिलेट आदि) को कच्चे माल के रूप में खरीदकर उससे केबल, कंडक्टर, बर्तन, एक्सट्रूज़न, फाउंड्री उत्पाद, वाहन कलपुर्जें और अन्य तैयार उत्पाद बनाते हैं।

एल्युमिनियम सेकेंडरी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एएसएमए), केबल्स एंड कंडक्टर्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएसीएमएआई) और फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया एल्युमिनियम यूटेंसिल्स मैन्युफैक्चरर्स (एफएआईएयूएम) ने हाल ही में खान मंत्रालय को संयुक्त ज्ञापन सौंपा है।

ज्ञापन में कहा गया है कि प्राथमिक एल्युमिनियम पर 8.25 प्रतिशत और कबाड़ पर 2.75 प्रतिशत के प्रभावी आयात शुल्क के कारण घरेलू उत्पादक आयात-समता (इम्पोर्ट पैरिटी) के आधार पर कीमतें तय करते हैं, जिससे डाउनस्ट्रीम उद्योगों की लागत बढ़ जाती है।

इन संगठनों ने कहा कि भारत की प्रति व्यक्ति एल्युमीनियम की खपत ढाई किलोग्राम है जो वैश्विक औसत 11 किलोग्राम की तुलना में काफी कम है। उनका कहना है कि सबसे बड़ी चिंता लागत की है।

उद्योग संगठनों का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में डाउनस्ट्रीम सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) का लाभ मार्जिन 70 प्रतिशत तक घट गया है, जबकि पिछले तीन माह में वैश्विक एल्युमिनियम कीमतों, मालढुलाई और ऊर्जा लागत बढ़ने से कच्चे माल की लागत 20–35 प्रतिशत तक बढ़ी है।

संगठनों का कहना है कि मौजूदा शुल्क व्यवस्था उलट शुल्क ढांचा पैदा कर रही है। एक ओर तैयार एल्युमिनियम उत्पाद मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के तहत बहुत कम या शून्य शुल्क पर आयात हो रहे हैं, वहीं प्राथमिक एल्युमिनियम पर अधिक आयात शुल्क लगता है। इसका असर केबल, कंडक्टर, बिजली पारेषण, ऊर्जा भंडारण, एक्सट्रूज़न, फाउंड्री और पुनर्चक्रण जैसे क्षेत्रों पर पड़ रहा है।

उद्योग संगठनों ने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ का कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) भारतीय एल्युमिनियम निर्यातकों की प्रतिस्पर्धी क्षमता को और प्रभावित कर सकता है।

संगठनों का मानना है कि यदि प्राथमिक एल्युमिनियम और कबाड़ पर सीमा शुल्क घटाया जाता है तो डाउनस्ट्रीम उद्योगों की लागत कम होगी, उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और मूल्यवर्धित एल्युमिनियम उत्पादों के निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

हालांकि, इस प्रस्ताव का विरोध प्राथमिक एल्युमिनियम उत्पादक कंपनियां कर सकती हैं, क्योंकि मौजूदा शुल्क व्यवस्था उन्हें आयात-समता के आधार पर बेहतर कीमतें दिलाने में मदद करती हैं।

सियासी मियार की रीपोर्ट