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अमेरिकी संसद में रूस विरोधी प्रतिबंध विधेयक पर घमासान तेज, भारत समेत प्रमुख खरीदारों पर 100% टैक्स या पूरी छूट की उठी मांग

अमेरिकी संसद में रूस विरोधी प्रतिबंध विधेयक पर घमासान तेज, भारत समेत प्रमुख खरीदारों पर 100% टैक्स या पूरी छूट की उठी मांग

वॉशिंगटन, 15 सितंबर । अमेरिकी सीनेट द्वारा भारी बहुमत से पारित ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ को लेकर प्रतिनिधि सभा (हाउस) में राजनीतिक खींचतान चरम पर पहुंच गई है। डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर द्वारा पेश किए गए नए संशोधन में भारत, चीन और तुर्की समेत 10 प्रमुख देशों का सीधे तौर पर नाम लेकर उन पर 100% तक का भारी ट्रेड टैरिफ लगाने की वकालत की गई है, जबकि मूल सीनेट बिल में केवल शीर्ष 5 आयातकों का सामान्य जिक्र था।
डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स ने टैक्स प्रावधान हटाने की रखी मांग, राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर 90 दिन की छूट का प्रस्ताव

इसके विपरीत, सांसद ग्रेगरी मीक्स ने कड़ा रुख अपनाते हुए विधेयक की धारा 113 को पूरी तरह से विलोपित (हटाने) करने का संशोधन पेश किया है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को व्यापारिक साझेदारों पर भारी शुल्क लगाने का व्यापक अधिकार देती है। इसके साथ ही मीक्स ने प्रावधान रखा है कि यदि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा हित में जरूरी हो, तो राष्ट्रपति विदेशी संस्थाओं को 90 दिनों की छूट दे सकें और साथ ही यूक्रेन के लिए 15 अरब डॉलर के लोन की मांग की है।
मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिकी संसद के पास बचे सिर्फ चार दिन, भारत की ऊर्जा कूटनीति के लिए अहम है फैसला

नवंबर के चुनावों से जुड़ी छुट्टियों से पहले हाउस के पास अंतिम चार कामकाजी दिन ही बचे हैं, जिससे इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि यह कड़ा प्रतिबंध विधेयक किस रूप में अंतिम मुहर तक पहुंचता है। रूसी तेल खरीद के कारण भारत पर 100% टैक्स लगाने या छूट मिलने के इस द्वंद्व पर नई दिल्ली की ऊर्जा खरीद रणनीतियों और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों के लिहाज से बेहद गहरी नजरें टिकी हुई हैं।

सियासी मियार की रीपोर्ट