देशप्रेम की लौ जले

देशभक्ति जब सो गई, बढ़ने लगे विकार।
जागो भारतवासियो, फिर जागें संस्कार।।
जो भारत के शत्रु हैं, उनसे कैसा प्यार।
देशप्रेम की लौ जले, घर-घर और हर द्वार।।
राष्ट्रविरोधी बात को, मत देना सम्मान।
सत्य, न्याय और देशहित, बनें सभी की जान।।
देश बचाना धर्म है, देश बढ़ाना कर्म।
भारत माँ की शान में, अर्पित हो हर धर्म।।
झूठे नारे छोड़कर, सच का रखिए साथ।
देशहित की राह में, बढ़ें मिलाकर हाथ।।
जाति-धर्म में मत बँटो, भारत की पहचान।
एक तिरंगे के तले, अपना हिंदुस्तान।।
देशप्रेम केवल नहीं, भाषण और बयान।
कर्मों से दिखता सदा, भारत का सम्मान।।
वीरों के बलिदान को, रखो सदा तुम याद।
उनकी पावन प्रेरणा, करती भारत आबाद।।
देशद्रोह की सोच को, मत देना विस्तार।
भारत की एकता ही, सबसे बड़ा हथियार।।
जब जागे जन-चेतना, मिटे सभी अँधियार।
देशप्रेम से ही सदा, जुड़ा रहे परिवार।।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
(डॉ. सत्यवान सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), एक कवि और सामाजिक विचारक है।)
सियासी मियार की रीपोर्ट
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