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आंख बंद कर करें चांदी में निवेश………मिलेगा मोटा मुनाफा…

आंख बंद कर करें चांदी में निवेश………मिलेगा मोटा मुनाफा…

मुंबई, 04 दिसंबर । रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2025 चांदी के लिए बेहद खास रहा है। चांदी की कीमत इस साल करीब दोगुनी हो चुकी है। इसके कई कारण हैं। इनमें सप्लाई की भारी कमी, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड की बड़ी खरीद, अमेरिका में कमजोर आर्थिक संकेत और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में कटौती की उम्मीदें शामिल हैं। इन सभी कारणों ने चांदी की कीमतों को तेजी से ऊपर पहुंचाया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने चांदी को महत्वपूर्ण खनिज की सूची में डाला है। इसके बाद आशंका बढ़ गई कि भविष्य में चांदी पर आयात शुल्क या अन्य नियंत्रण लग सकते हैं। इसकारण निवेशकों और उद्योगों ने तेजी से चांदी खरीदनी शुरू कर दी। इसी समय दुनिया भर में चांदी का भंडार भी काफी घट गया। शंघाई में स्टॉक 10 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। लंदन में भी चांदी का भंडार काफी कम है। अमेरिका के कॉमेक्स एक्सचेंज से भी बहुत अधिक चांदी बाहर निकाली गई है। दुनिया के सबसे बड़े सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड एस एल वी ने इस सप्ताह 324 टन चांदी खरीदी है। यह कई महीनों में सबसे बड़ी खरीद है और इससे साफ पता चलता है कि बड़े निवेशक चांदी में और तेजी की उम्मीद कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, चांदी ने तकनीकी चार्ट पर एक महत्वपूर्ण कप एंड हैंडल पैटर्न बनाया है, इस लंबे समय की तेजी का संकेत माना जाता है। चांदी ने 173965 के महत्वपूर्ण स्तर को छू लिया है। यह स्तर कई महीनों से एक बड़ी रुकावट था। इसके ऊपर टिके रहने का मतलब है कि आगे चांदी की कीमत 193800 रुपये तक जा सकती है। अगर बाजार की स्थितियां इसतरह की रहती हैं तब चांदी 206000 रुपये तक भी पहुंच सकती है।
तकनीकी संकेतक भी तेजी की ओर इशारा कर रहे हैं। रिपोर्ट का कहना है कि जब तक चांदी की कीमत 173965 रुपये के ऊपर बनी रहती है, तब तक तेजी का रुझान कायम रहेगा। वैश्विक स्तर पर सप्लाई की कमी, निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड की भारी खरीद और ब्याज दर में कटौती की उम्मीदें चांदी को 2025 में 2 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर के और करीब ले जा सकती हैं।
कमोडिटी विशेषज्ञ का कहना है कि चांदी की कीमत लंबे समय से बढ़ रही है क्योंकि इसकी औद्योगिक मांग बहुत बढ़ गई है। चांदी अब कई तरह की नई तकनीकों और मशीनों में ज्यादा इस्तेमाल हो रही है, इसलिए इसकी खपत पहले से कहीं ज्यादा है। पिछले 10 साल में इस मांग में लगातार बढ़ोतरी हुई है।

सियासी मियार की रीपोर्ट