कौन हैं भारतीय मूल के नील कत्याल? जिन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप के ‘टैरिफ प्लान’ को दी पटखनी, राष्ट्रपति की शक्तियों को बताया असंवैधानिक

वॉशिंगटन, 21 फरवरी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक आयात शुल्कों (टैरिफ) को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाले प्रमुख चेहरा भारतीय मूल के वकील नील कत्याल हैं। ओबामा प्रशासन में अमेरिका के कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल रह चुके कत्याल ने अदालत में मजबूती से दलील दी कि व्यापार को विनियमित करने की संवैधानिक शक्ति संसद (कांग्रेस) के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास। उनकी इसी सटीक दलील के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप के टैरिफ को अवैध करार दिया। इस जीत के बाद नील कत्याल न केवल अमेरिकी न्याय व्यवस्था बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गलियारों में सबसे चर्चित चेहरा बन गए हैं।
शिकागो में जन्मे नील कत्याल भारतीय अप्रवासी माता-पिता की संतान हैं। येल लॉ स्कूल से शिक्षा प्राप्त करने वाले कत्याल ने अपने करियर में अब तक 50 से अधिक मामलों में सर्वोच्च अदालत के भीतर पैरवी की है। उन्होंने 2017 में ट्रंप के विवादित ‘ट्रैवल बैन’ को चुनौती दी थी और मशहूर ‘जॉर्ज फ्लॉयड मर्डर केस’ में विशेष अभियोजक के रूप में न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। वर्तमान में जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और मिलबैंक एलएलपी में पार्टनर कत्याल को अमेरिकी न्याय विभाग के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘एडमंड रैंडॉल्फ अवॉर्ड’ से भी नवाजा जा चुका है।
नील कत्याल की यह जीत राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका है। कत्याल ने अपनी चर्चित किताब ‘Impeach: The Case Against Donald Trump’ में पहले ही ट्रंप की नीतियों के खिलाफ कड़े कानूनी तर्क पेश किए थे। इस ताजा फैसले ने साबित कर दिया है कि कानून की सही व्याख्या से सत्ता के बड़े फैसलों को बदला जा सकता है। कत्याल की कानूनी सूझबूझ का ही परिणाम है कि अब भारत समेत दुनिया भर के देशों के साथ अमेरिकी व्यापारिक संबंधों में स्थिरता आने की उम्मीद है, क्योंकि राष्ट्रपति अब मनमाने ढंग से भारी टैक्स नहीं थोप सकेंगे।
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