हवाई सफर हुआ महंगा, एयर इंडिया और इंडिगो ने ₹16,000 तक बढ़ाया किराया, युद्ध के चलते तेल की कीमतों में उछाल और रूट बदलने से बढ़ा विमानन कंपनियों का खर्च

नई दिल्ली, 19 मार्च पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध और वैश्विक तेल बाजार में मची उथल-पुथल का सीधा असर अब हवाई यात्रियों की जेब पर पड़ने लगा है। देश की प्रमुख एयरलाइनों—एयर इंडिया, इंडिगो और आकासा एयर—ने विमान ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतों और परिचालन लागत को देखते हुए ‘फ्यूल सरचार्ज’ को फिर से लागू कर दिया है। विमानन विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में हवाई किरायों में 20% तक की भारी वृद्धि देखने को मिल सकती है। विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय रूटों पर यात्रा करना अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा खर्चीला हो जाएगा, जिससे विदेशी पर्यटन और विदेशों में पढ़ रहे छात्रों के बजट पर बुरा असर पड़ना तय है।
ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने न केवल कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित की है, बल्कि सुरक्षा कारणों से एयरलाइनों को पश्चिम एशिया के हवाई क्षेत्र का उपयोग करने से भी बचना पड़ रहा है। रूट बदलने के कारण उड़ानों की दूरी और समय बढ़ गया है, जिससे ईंधन की खपत, चालक दल के खर्च और तकनीकी ठहराव की लागत में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। एयर इंडिया ने अंतरराष्ट्रीय रूटों पर $10 से लेकर उत्तरी अमेरिका के लिए $200 (लगभग ₹16,600) तक का अतिरिक्त शुल्क वसूलना शुरू कर दिया है। वहीं इंडिगो ने दूरी के आधार पर ₹425 से लेकर ₹2,300 तक का सरचार्ज लागू किया है, जिससे आम आदमी के लिए हवाई यात्रा ‘पहुँच’ से बाहर होती जा रही है।
विमानन विशेषज्ञ संजय लाजर के अनुसार, रूट लंबे होने और बीमा प्रीमियम में वृद्धि के कारण वास्तविक किराए में भारी बढ़ोतरी हुई है। उदाहरण के तौर पर, यूरोप जैसे रूटों पर चार सदस्यों के परिवार के लिए अब लगभग ₹50,000 का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। दूसरी ओर, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने यात्रियों को राहत देने के लिए 60% सीटों को मुफ्त आवंटित करने जैसे नए नियम जारी किए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइनें इन नियमों से होने वाले नुकसान की भरपाई भी अंततः यात्रियों से ही करेंगी। फिलहाल वैश्विक स्थिति को देखते हुए निकट भविष्य में किराए कम होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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