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ईरान के परमाणु संयंत्रों पर भीषण हमला, अबू धाबी में गिरी बैलिस्टिक मिसाइल, 5 भारतीय नागरिक घायल, अमेरिका पश्चिम एशिया में 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी में

ईरान के परमाणु संयंत्रों पर भीषण हमला, अबू धाबी में गिरी बैलिस्टिक मिसाइल, 5 भारतीय नागरिक घायल, अमेरिका पश्चिम एशिया में 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी में

वॉशिंगटन/तेहरान, 28 मार्च। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए सैन्य अभियान के 29वें दिन युद्ध ने और भी भयानक रूप ले लिया है। ताजा हमलों में ईरान के परमाणु संयंत्रों को निशाना बनाया गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। इसी संघर्ष के बीच अबू धाबी में एक बैलिस्टिक मिसाइल का मलबा गिरने से वहां मौजूद 5 भारतीय नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने जी-7 (G7) देशों की बैठक के बाद स्पष्ट किया कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान की उन सभी सैन्य क्षमताओं को नष्ट करना है जो उसे परमाणु हथियार विकसित करने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यह संघर्ष महीनों के बजाय कुछ ही हफ्तों में निर्णायक मोड़ पर पहुंच जाएगा।

जमीनी हालात का जायजा लेते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि अब तक इस संघर्ष में 300 से अधिक अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं और 13 सैनिकों की जान जा चुकी है। हालांकि विदेश मंत्री का मानना है कि जमीनी सेना के बिना भी लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन पश्चिम एशिया में 10,000 अतिरिक्त सैनिकों को भेजने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इन सैनिकों में 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के साथ-साथ पैदल सेना और बख्तरबंद वाहनों की टुकड़ियां भी शामिल होंगी। अमेरिका का यह कदम तेहरान के साथ जारी बातचीत के बावजूद अपनी सैन्य पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

ईरान और लेबनान पर इजराइली हमले जारी रहने के बीच, ईरान भी खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लगातार निशाना बना रहा है। खाड़ी देशों में बैलिस्टिक मिसाइलों के गिरने से अंतरराष्ट्रीय नागरिक, विशेषकर भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा हो गई है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं, लेकिन 10,000 अतिरिक्त सैनिकों की संभावित तैनाती इस बात का संकेत है कि युद्ध का दायरा बढ़ सकता है। वैश्विक समुदाय इस समय ऊर्जा संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता के डर से दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है, परंतु युद्ध के मैदान में फिलहाल शांति के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

सियासी मियार की रीपोर्ट