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भारत का रक्षा निर्यात 4 अरब डॉलर के ऐतिहासिक पार,

भारत का रक्षा निर्यात 4 अरब डॉलर के ऐतिहासिक पार,

-ब्रह्मोस और पिनाका के मुरीद हुए अमेरिका और इजरायल जैसे दिग्गज देश, ‘मेक इन इंडिया’ ने वैश्विक स्तर पर गाड़ा सफलता का झंडा

नई दिल्ली, 03 अप्रैल। भारत ने रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए पिछले वित्त वर्ष में 4 अरब डॉलर (लगभग ₹33,000 करोड़ से अधिक) के रक्षा निर्यात का आंकड़ा पार कर लिया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह पिछले वर्ष की तुलना में 60 प्रतिशत से अधिक की भारी वृद्धि को दर्शाता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता को भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती मजबूती और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की जीत बताया है। वर्तमान में भारत का रक्षा इकोसिस्टम इतना सशक्त हो चुका है कि सरकारी कंपनियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र भी इस निर्यात में 45 प्रतिशत का महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जिससे भारत अब दुनिया के शीर्ष 25 रक्षा निर्यातकों की सूची में मजबूती से खड़ा है।

भारत की सैन्य शक्ति का लोहा अब फिलीपींस से लेकर आर्मेनिया तक माना जा रहा है। फिलीपींस ने चीन की चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सौदा कर रक्षा इतिहास में नया अध्याय जोड़ा है। वहीं, आर्मेनिया भारत से पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम जैसे घातक हथियारों की खरीद कर रहा है। आश्चर्यजनक रूप से, अमेरिका, फ्रांस और इजरायल जैसे सैन्य रूप से संपन्न देश भी भारत से बुलेटप्रूफ जैकेट, रडार सिस्टम, एयरोस्पेस कंपोनेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आयात कर रहे हैं। भारत अब 100 से अधिक देशों को अपनी रक्षा तकनीक और साजो-सामान की आपूर्ति कर रहा है, जो भारत की तकनीकी श्रेष्ठता का प्रमाण है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘मेक इन इंडिया’ नीति ने भारत को केवल एक खरीदार से बदलकर एक विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता (सप्लायर) बना दिया है। ऑस्ट्रेलिया, यूएई, सऊदी अरब और जर्मनी जैसे देश अब भारतीय रक्षा उत्पादों पर भरोसा जता रहे हैं। यह उपलब्धि न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही है, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी भारत की स्थिति को वैश्विक पटल पर और अधिक प्रभावी बना रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात की यही गति जारी रही, तो आने वाले कुछ वर्षों में भारत वैश्विक रक्षा विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी के साथ-साथ लाखों नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

सियासी मियार की रीपोर्ट