अगले हफ्ते आरबीआई की एमपीसी बैठक में ब्याज दरों पर होगा अहम फैसला
-कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच क्या महंगी होगी आपकी ईएमआई, विशेषज्ञों ने दी बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली, 03 अप्रैल। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की महत्वपूर्ण बैठक अगले सप्ताह 6 अप्रैल से 8 अप्रैल के बीच होने जा रही है। बाजार विशेषज्ञों और एचएसबीसी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दरों यानी रेपो रेट में फिलहाल कोई बदलाव करने की संभावना कम है। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई अस्थिरता ने नीति निर्माताओं के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि जब तक ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर स्थिर नहीं हो जातीं, तब तक आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर आम जनता पर ईएमआई का बोझ बढ़ाने से बचेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा ऊर्जा संकट पिछले वर्षों के मुकाबले अधिक जटिल है, क्योंकि इस बार केवल कीमतें ही नहीं बढ़ी हैं बल्कि आपूर्ति श्रृंखला में भी भारी बाधाएं देखी जा रही हैं। यदि तेल की औसत कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव सीमित रहेगा और महंगाई दर आरबीआई के 6 प्रतिशत के संतोषजनक स्तर के भीतर बनी रहेगी। एचएसबीसी के मॉडल के अनुसार, रुपये की विनिमय दर को बचाने के लिए ब्याज दरों में जल्दबाजी में की गई बढ़ोतरी आर्थिक विकास की गति को धीमा कर सकती है। ऐसी स्थिति में रिजर्व बैंक का प्राथमिक उद्देश्य महंगाई को नियंत्रित करने के साथ-साथ विकास दर को बचाए रखना होगा।
आरबीआई ने हाल ही में 27 मार्च को बैंकों के विदेशी मुद्रा व्यापार से जुड़े नियमों को सख्त किया है, जिससे बाजार में अटकलें तेज हो गई थीं कि क्या दरों में भी बढ़ोतरी होगी। हालांकि, नीति निर्माताओं को सलाह दी गई है कि वे केवल मांग को नियंत्रित करने के बजाय आपूर्ति पक्ष की बाधाओं को दूर करने पर ध्यान दें। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो ‘स्टिकी इन्फ्लेशन’ (जिद्दी महंगाई) की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे भविष्य में दरों में वृद्धि अनिवार्य हो जाएगी। फिलहाल, सभी की निगाहें 8 अप्रैल को होने वाले आरबीआई के आधिकारिक ऐलान पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि आपकी होम लोन और कार लोन की किस्तें स्थिर रहेंगी या बढ़ेंगी।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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