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‘मुंबई के विवियन रिचर्ड्स’ कहे जाने वाले दिग्गज क्रिकेटर अनिल गुरव का 61 वर्ष की आयु में निधन

‘मुंबई के विवियन रिचर्ड्स’ कहे जाने वाले दिग्गज क्रिकेटर अनिल गुरव का 61 वर्ष की आयु में निधन

-सचिन तेंदुलकर ने उनके ही बल्ले से जड़ा था अपना पहला शतक

मुंबई, 03 अप्रैल । क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के सीनियर और शानदार बल्लेबाज अनिल गुरव का 31 मार्च, 2026 को 61 वर्ष की आयु में नालासोपारा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। अनिल गुरव द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच रमाकांत आचरेकर के उन शुरुआती और सबसे प्रतिभाशाली शिष्यों में से एक थे, जिनकी बल्लेबाजी देख खुद सचिन और विनोद कांबली खेल की बारीकियां सीखते थे। अपनी आक्रामक और बेखौफ बल्लेबाजी शैली के कारण वे अपने मित्रों और खेल गलियारों में ‘मुंबई के विवियन रिचर्ड्स’ के नाम से मशहूर थे। उनके निधन से मुंबई के स्थानीय क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई है और खेल प्रेमियों ने एक ऐसी प्रतिभा को खो दिया है जिसकी चर्चा मैदानों पर हमेशा होती रहेगी।

अनिल गुरव का सचिन तेंदुलकर के शुरुआती करियर में एक बेहद खास और ऐतिहासिक योगदान रहा है। बताया जाता है कि जब सचिन ने अपना पहला प्रतिस्पर्धी शतक बनाया था, तब उन्होंने अनिल गुरव से उधार मांगकर उनके बल्ले का इस्तेमाल किया था। कोच रमाकांत आचरेकर अक्सर युवा सचिन और कांबली को गुरव की बल्लेबाजी दिखाने ले जाते थे ताकि वे उनके फुटवर्क और स्ट्रोक प्ले को समझ सकें। हालांकि, सचिन जहां क्रिकेट की ऊंचाइयों पर पहुंचे, वहीं अनिल गुरव क्लब स्तरीय क्रिकेट से आगे नहीं बढ़ पाए। उनकी कहानी भारतीय क्रिकेट इतिहास के उन पन्नों में दर्ज है जो प्रतिभा और दिग्गज खिलाड़ियों के बीच के गहरे संबंधों को उजागर करती है।

अनिल गुरव का जीवन केवल क्रिकेट की यादों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी के लिए एक बड़ा सबक भी है। विवियन रिचर्ड्स जैसी अद्भुत प्रतिभा होने के बावजूद, कुछ गलत आदतों, कठिन परिस्थितियों और गलत फैसलों के कारण वे कभी मुंबई की मुख्य टीम या भारतीय टीम में जगह नहीं बना सके। उनकी अधूरी कहानी यह साबित करती है कि केवल टैलेंट ही सफलता की गारंटी नहीं है; कामयाबी के लिए सही दिशा, कड़ा अनुशासन और सही समय पर सही फैसले लेना अनिवार्य है। आज उनके निधन पर क्रिकेट जगत उन्हें एक ऐसे बल्लेबाज के रूप में याद कर रहा है जिसके पास हुनर तो बेमिसाल था, लेकिन किस्मत और अनुशासन ने उनका साथ नहीं दिया।

सियासी मियार की रीपोर्ट