होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई बड़ी राहत: कच्चे तेल की कीमतों में 11% की ऐतिहासिक गिरावट,
-भारत में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस सस्ते होने की जगी उम्मीद

नई दिल्ली, 18 अप्रैल । ईरान द्वारा 49 दिनों की लंबी नाकेबंदी के बाद ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को वाणिज्यिक जहाजों के लिए फिर से खोलने के फैसले ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है। इस घोषणा के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 11% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे भाव लुढ़क कर 88.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। वहीं अमेरिकी कच्चे तेल (WTI) में भी 11.4% की कमी आई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया है कि युद्धविराम की शेष अवधि के दौरान जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल रहेगी, जिससे ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता फिलहाल टल गई है।
होर्मुज मार्ग का खुलना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी ‘संजीवनी’ से कम नहीं है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल इसी रास्ते से आयात करता है। नाकेबंदी के कारण पिछले महीने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गहरा संकट मंडराने लगा था और रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई थी। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में आई इस बड़ी कमी से भारत के आयात बिल में अरबों डॉलर की बचत होगी। इससे घरेलू बाजार में लंबे समय से बढ़ रहे पेट्रोल और डीजल के दामों पर लगाम लगने की प्रबल संभावना है, जो आम जनता को महंगाई से बड़ी राहत दे सकता है।
इस कूटनीतिक जीत के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति संदेशों की भी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ परमाणु और क्षेत्रीय विवादों को सुलझाने के लिए जल्द ही एक ठोस समझौता हो सकता है। हालांकि किसी समयसीमा का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन उनकी सकारात्मक टिप्पणियों और समुद्री मार्ग के खुलने से निवेशकों का भरोसा लौटा है। यदि आने वाले दिनों में स्थिरता बनी रहती है, तो न केवल तेल बल्कि प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी और गिरावट आ सकती है, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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