शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग पर भारत सरकार का बड़ा बयान: बांग्लादेश की औपचारिक अपील पर कानूनी समीक्षा शुरू
-ढाका और दिल्ली के बीच कूटनीतिक हलचल हुई तेज

नई दिल्ली, 18 अप्रैल। भारत सरकार ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर ढाका द्वारा की गई औपचारिक मांग पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि प्रत्यर्पण की अपील का गहन परीक्षण शुरू कर दिया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पूरी प्रक्रिया भारत के न्यायिक और आंतरिक कानूनी ढांचे के तहत आगे बढ़ रही है। सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय सभी कानूनी पहलुओं और द्विपक्षीय संधियों का बारीकी से विश्लेषण कर रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जा सके।
ज्ञात हो कि साल 2024 में बांग्लादेश में हुए हिंसक तख्तापलट और व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना ने पद से इस्तीफा देकर भारत में शरण ली थी। तब से वे भारत में ही रह रही हैं, जिसे लेकर बांग्लादेश की नई सरकार लगातार उनके प्रत्यर्पण का दबाव बना रही है। भारत ने 2025 में इस अनुरोध के मिलने की पुष्टि की थी। यह मामला भारत के लिए कूटनीतिक रूप से काफी जटिल है, क्योंकि एक ओर वर्षों पुरानी मित्रता और शरण देने की परंपरा है, तो दूसरी ओर पड़ोसी देश की नई सत्ता के साथ मजबूत रणनीतिक संबंध बनाए रखने की चुनौती है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया है कि भारत, बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों को स्थिर और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसी एक व्यक्ति से जुड़ा मामला दोनों देशों के व्यापक सहयोग और साझा हितों को प्रभावित न करे। जल्द ही दोनों देशों के बीच आधिकारिक स्तर पर उच्चस्तरीय बातचीत होने की संभावना है। भारत एक संतुलित रुख अपनाते हुए ‘सामान्य कामकाज’ की नीति पर कायम है, जिससे क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे और द्विपक्षीय व्यापार व सुरक्षा सहयोग निर्बाध रूप से चलता रहे।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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