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ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर कांग्रेस का केंद्र पर तीखा प्रहार, पाकिस्तान को मिल रही अंतरराष्ट्रीय प्रशंसा पर उठाए सवाल

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर कांग्रेस का केंद्र पर तीखा प्रहार, पाकिस्तान को मिल रही अंतरराष्ट्रीय प्रशंसा पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 07 मई। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक साल पूरे होने पर मोदी सरकार की विदेश नीति और रणनीतिक फैसलों को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने याद दिलाया कि 10 मई, 2025 को अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद अचानक हुए युद्धविराम ने भारत की कूटनीतिक स्थिति को कमजोर किया। रमेश का आरोप है कि 2008 के मुंबई हमलों के विपरीत, इस बार भारत पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में विफल रहा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के ‘मित्र’ राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व की प्रशंसा की है, जो भारत के लिए एक गंभीर कूटनीतिक चिंता का विषय है।

कांग्रेस ने सैन्य अधिकारियों के पिछले बयानों का हवाला देते हुए दावा किया कि राजनीतिक नेतृत्व द्वारा लगाई गई पाबंदियों के कारण भारत को ऑपरेशन के दौरान विमानों और सामरिक बढ़त का नुकसान उठाना पड़ा। जयराम रमेश ने लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई में चीन ने सैटेलाइट इमेजरी और वास्तविक समय में डेटा प्रदान कर सक्रिय भूमिका निभाई थी। विपक्षी दल ने आरोप लगाया कि एक तरफ चीन सीमा पार पाकिस्तान की मदद कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार लद्दाख में गश्ती अधिकारों और व्यापारिक नियमों पर चीन के सामने ‘आत्मसमर्पण’ कर रही है।

विपक्ष ने कारगिल युद्ध के बाद वाजपेई सरकार द्वारा गठित ‘के. सुब्रह्मण्यम समिति’ का उदाहरण देते हुए ऑपरेशन सिंदूर की भी गहन समीक्षा की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि जिस तरह कारगिल के बाद संसद में ‘आश्चर्य से परिणाम तक’ रिपोर्ट पेश की गई थी, उसी तरह इस ऑपरेशन की रणनीतिक चूक और उपलब्धियों पर श्वेत पत्र जारी होना चाहिए। गौरतलब है कि पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में 7 मई को यह ऑपरेशन शुरू किया गया था, जिसमें नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया गया था, लेकिन अब इस पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है।

सियासी मियार की रीपोर्ट