पहले टारगेट को निशाना बनाने घंटों लगते थे, अब ऐसे फैसले सेकंड में होते हैं
वॉशिंगटन, पेंटागन की चाहत आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) को सैन्य अभियानों से जोड़ने की थी। किताब में कैटरीना ने मरीन कर्नल ड्रयू कुकोर के इसे लेकर ऑब्सेशन पर फोकस किया है। पेंटागन ने ‘प्रॉजेक्ट मेवन’ 2017 में तब शुरू किया था, जब उसे लगा कि वह एआई टेक्नॉलजी में चीन से पिछड़ रहा है। इस प्रॉजेक्ट में ड्रोन फुटेज का विश्लेषण एल्गोरिदम के जरिये किया जाता था। एक पत्रकार जिन्होंने इस प्रॉजेक्ट से वाकिफ करीब 200 लोगों से बातचीत कर कई ऐसी जानकारियां दी हैं, जिनसे दुनिया अनजान है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक किताब की शुरुआत पेंटागन के मध्यम रोशनी वाले एक कमरे से होती है, जिसमें कर्नल ड्रयू बैठे हैं और वह अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की बढ़ती मौत की घटनाओं से हताश हैं। वहां वह एआई के सैन्य अभियानों में इस्तेमाल के लिए एक टीम बनाते हैं। कर्नल कल्पना करते हैं कि यह टीम उन्हें रियल टाइम डेटा देगी ताकि फौज को बढ़त हासिल हो सके। उनकी इस कल्पना से प्रॉजेक्ट मेवन का जन्म होता है। इसके लिए शुरुआत में पेंटागन, गूगल से उसकी कंप्यूटर विजन टेक्नॉलजी के लिए पार्टनरशिप करता है ताकि बड़े पैमाने पर ड्रोन्स से मिल रहे डेटा को स्कैन किया जा सके। हालांकि, कर्मचारियों के विरोध की वजह से गूगल के इस प्रॉजेक्ट से बाहर होने के बाद उसकी जगह पलानटिर, एमेजॉन, माइक्रोसॉफ्ट और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां लेती हैं।
इस किताब को पढ़ते हुए ड्रयू एक स्टार्टअप फाउंडर की तरह दिखते हैं। जो लालफीताशाही और पेंटागन के अंदर प्रतिद्वंद्विता से जूझते हुए प्रॉजेक्ट पर आगे बढ़ते जाते हैं। उनकी इसे तेज रफ्तार से बढ़ाने में अहम भूमिका होती है। इसमें इस प्रॉजेक्ट से जुड़ी खामियां भी सामने आती हैं। रिपोर्ट में पत्रकार कहती हैं कि कर्नल की टीम संघर्षों के दौरान ऐसे एल्गो का इस्तेमाल करती है, जिसका पहले ट्रायल नहीं हुआ। एआई के पेंटागन के इस्तेमाल करने का नतीजा यह होता है कि जहां पहले किसी टारगेट की हत्या करनी है या नहीं, उसमें घंटों का समय लगता था, अब ऐसे फैसले सेकंड में होते हैं।
किताब में बताया गया है कि अब अमेरिका की सभी सैन्य शाखाओं में एआई का प्रयोग किया जा रहा है और यहां तक इसे नाटो ने भी अपनाया है। किताब में ईरान के साथ संघर्ष और यूक्रेन की रूस के खिलाफ युद्ध में एआई की मदद लेने के वाकयों का जिक्र किया है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि भविष्य में होने वाले युद्धों में इस तकनीक की भूमिका किस तरह से बढ़ने जा रही है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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