UNSC में पाकिस्तान-चीन की बड़ी कूटनीतिक हार: BLA को वैश्विक आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव अमेरिका ने वीटो कर किया खारिज

संयुक्त राष्ट्र (न्यूयॉर्क), 10 जून । संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान और चीन को एक बड़ी कूटनीतिक शिकस्त का सामना करना पड़ा है। इन दोनों देशों ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी इकाई ‘मजीद ब्रिगेड’ को वैश्विक आतंकी सूची में शामिल करने का संयुक्त प्रस्ताव रखा था, जिसे अमेरिका ने वीटो का उपयोग करते हुए रोक दिया। इस कदम के साथ ही फ्रांस और ब्रिटेन ने भी अमेरिका का समर्थन किया, जिससे पाकिस्तान की ओर से की गई यह मांग सुरक्षा परिषद में पूरी तरह नाकाम हो गई।
अफगानिस्तान और आतंकवाद पर घमासान
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थाई प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने दलील दी थी कि BLA अफगानिस्तान की धरती का उपयोग कर सीमा पार आतंकी हमलों को अंजाम दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि अफगानिस्तान में लगभग 60 आतंकी शिविर सक्रिय हैं, जो पाकिस्तान के लिए खतरा बने हुए हैं। हालाँकि, सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्यों ने पाकिस्तान के इन दावों और प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसे चीन की उन पुरानी रणनीतियों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है जहाँ उसने भारत के आतंकी प्रस्तावों में बाधा डाली थी।
अमेरिका का स्पष्ट रुख और कूटनीतिक समीकरण
अमेरिका का प्रस्ताव को रोकना यह संकेत नहीं है कि वह BLA को समर्थन देता है। ज्ञात हो कि अमेरिका ने 2019 में ही BLA और मजीद ब्रिगेड को ‘खास तौर पर नामित वैश्विक आतंकवादी’ (SDGT) घोषित किया हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम जटिल भू-राजनीतिक समीकरणों और रणनीतिक हितों का हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र के मंच पर ऐसे प्रस्तावों का वीटो होना यह दर्शाता है कि वैश्विक मंचों पर आतंकवाद के मुद्दे पर अलग-अलग देशों के कूटनीतिक स्वार्थ अक्सर टकराव की स्थिति पैदा करते हैं।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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