कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक ही परिवार के 6 लोगों को जिंदा जलाने वाले आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई

बेंगलुरु, । कर्नाटक हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक अहम फैसला सुनाते हुए साल 2013 के बहुचर्चित हत्याकांड में आरोपी अब्दुल शरीफ उर्फ आमिर जान को दोषी करार दिया है। जस्टिस एचपी संदेश और जस्टिस बी. प्रमोद की अदालत ने राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए मैसूर की निचली अदालत के उस आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें सबूतों के अभाव का हवाला देकर आरोपी को बरी कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में मौजूद फोरेंसिक (FSL) रिपोर्ट और चश्मदीद गवाहों के पुख्ता सबूतों से यह साबित होता है कि आरोपी ने ही सुनियोजित तरीके से इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया था।
आईपीसी की गंभीर धाराओं के तहत उम्रकैद और ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर का निर्देश
अदालत ने दोषी अब्दुल शरीफ को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास) और 436 (आगजनी से भारी नुकसान) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मौजूदा समय में 63 वर्ष के हो चुके दोषी को अदालत ने तुरंत ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का सख्त निर्देश दिया है। बेंच ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि निचली अदालत ने मामूली तकनीकी पहलुओं पर ध्यान देकर ठोस सबूतों को नजरअंदाज करने की गंभीर भूल की थी, जिसे उच्च अदालत ने दुरुस्त किया है।
पैसे के विवाद में आधी रात को घर में पेट्रोल छिड़ककर की गई थी निर्मम हत्या
यह दिल दहला देने वाली घटना 12 अप्रैल 2013 की आधी रात को मैसूर के उदयगिरी पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई थी। आरोपी अब्दुल शरीफ और पीड़ित परिवार के बीच पैसों के लेनदेन को लेकर पुराना विवाद चल रहा था, जिसके गुस्से में आकर उसने रंजिश के तहत पीड़ित के घर पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी थी। इस वीभत्स अग्निकांड में मोहम्मद आमिर जान, उनकी मां अफरोज बेगम और चार अन्य सदस्यों सहित कुल छह लोगों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई थी, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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