उच्चतम न्यायालय को तत्काल संज्ञान लेकर ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह ठहराना चाहिए: कांग्रेस
नई दिल्ली,। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े विवाद के बीच शनिवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह ठहराना चाहिए।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों को युवा मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन शिविर आयोजित करने और सोशल मीडिया के माध्यम से इसका व्यापक प्रचार करने का निर्देश दिया।
रमेश ने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 में किया गया बदलाव “पूरी तरह अवैध” है और निर्वाचन आयोग के पास इसमें एकतरफा संशोधन करने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि जुलाई, 2026 की शुरुआत में ऑनलाइन फॉर्म में बिना किसी आधिकारिक अधिसूचना के बदलाव किया गया और उसमें एक नया अनिवार्य खंड जोड़ा गया, जिसमें आवेदकों से यह जानकारी मांगी गई कि उनके माता-पिता या दादा-दादी पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में शामिल थे या नहीं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह प्रावधान खासकर पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के लिए बाधा पैदा करता है।
उन्होंने दावा किया कि फॉर्म-6 में संशोधन करने की शक्ति निर्वाचन आयोग के बजाय केंद्र सरकार के पास है और ऐसा बदलाव संबंधित नियमों में संशोधन के बिना नहीं किया जा सकता।
रमेश ने ‘पंजीकरण निर्वाचक नियम, 1960’ का हवाला देते हुए दावा किया कि फॉर्म में बदलाव के लिए नियमों में आवश्यक संशोधन और संसद को इसकी सूचना दिया जाना जरूरी था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने इस बदलाव को “अवैध और अनधिकृत” बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी, ताकि युवा और पहली बार मतदाता बनने वाले लोग बिना परेशानी के अपना पंजीकरण करा सकें।
रमेश ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में संवैधानिक परंपराओं और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों का उल्लंघन हुआ है।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय को इस मामले का स्वत: संज्ञान लेकर जवाबदेही तय करनी चाहिए।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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