व्यापार समझौता भारत-अमेरिका संबंधों को ‘बेहतर’ बनाने में योगदान दे सकता है : जयशंकर

न्यूयॉर्क, 29 सितंबर । विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच यदि व्यापार समझौता संपन्न होता है, तो इससे दोनों देशों के संबंध ‘‘बेहतर’’ होंगे।
उन्होंने कहा कि वार्ता में तेजी से प्रगति की उम्मीद के सामने जमीनी हकीकत कहीं अधिक जटिल रही है।
जयशंकर ने सोमवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के उच्चस्तरीय सप्ताह के समापन पर ‘एशिया सोसाइटी’ द्वारा आयोजित विशेष संवाद में भारतीय-अमेरिकी एवं प्रवासी समुदाय के प्रमुख सदस्यों तथा नीति विशेषज्ञों को संबोधित किया।
एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के ‘डिस्टिंग्विश्ड फेलो’ और पूर्व अमेरिकी राजनयिक डेनियल रसेल की अध्यक्षता में हुए संवाद के दौरान जयशंकर से भारत-अमेरिका संबंधों, खासकर पिछले एक साल में व्यापार एवं शुल्क से जुड़े घटनाक्रम तथा द्विपक्षीय संबंधों को ‘‘बेहतर दिशा’’ में ले जाने के लिए क्या किए जाने की जरूरत है, इस बारे में पूछा गया।
जयशंकर ने कहा, ‘‘अगर मैं संबंधों की बात करूं तो दुनिया के एक बड़े हिस्से के लिए अमेरिका के साथ संबंध निभाना काफी कठिन रहा है। मेरा मतलब है कि यह कोई तसल्ली देने वाली बात तो नहीं है लेकिन यही हकीकत है। ’’
उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों के सामने मौजूद मुद्दों में से एक व्यापार वार्ता है।
वार्ता में शामिल ‘‘दांव’’ और ‘‘जटिलता’’ की ओर इशारा करते हुए जयशंकर ने कहा, ‘‘यह ध्यान में रखना चाहिए कि भारत छोटे उत्पादकों, छोटे कृषि उत्पादकों और छोटी फैक्टरी वालों का देश है। भारत और अमेरिका के बीच प्रति व्यक्ति आय के अंतर के अलावा, उत्पादन की प्रकृति एवं समाज की प्रकृति भी बहुत अलग है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए काफी धैर्य और बारीकियों पर ध्यान देने की जरूरत होती है… इसके तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद को ऐसी जमीनी हकीकत की कसौटी पर परखा गया, जो कहीं अधिक जटिल थी।’’
जयशंकर ने कहा कि ‘‘आज हम ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं जहां व्यापार समझौते को लेकर कमोबेश एक समझ बन गई है।’’
भारत और अमेरिका ने फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए रूपरेखा को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। हालांकि, अमेरिका के शुल्क ढांचे में बदलाव के कारण समझौते पर आगे भी बातचीत हुई है।
अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए जवाबी शुल्क को रद्द कर दिया था। इसके बाद अमेरिका ने शुल्क का एक अलग ढांचा अपनाया। अमेरिका ने जुलाई में भारत से आयात पर व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया था। यह कदम भारत द्वारा ‘बंधुआ मजदूरी’ के जरिये बनाई गई वस्तुओं से जुड़े उपायों की जांच के बाद उठाया गया था।
इसके बाद से दोनों देशों ने अमेरिका के शुल्क व्यवस्था में बदलाव के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखी है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की टिप्पणियों का संदर्भ देते हुए जयशंकर ने कहा कि अब मुद्दा यह है कि अमेरिकी पक्ष में क्या बदलाव आया है और धारा 301 की नई प्रक्रिया समझौते को किस तरह प्रभावित करेगी।
जयशंकर ने कहा, ‘‘301 प्रक्रिया अभी जारी है और आगे बढ़ रही है। इसलिए हमारे लिए मुद्दा यह है कि किस बिंदु पर ऐसे समझौते को अंतिम रूप दिया जाए जो काफी हद तक आगे बढ़ चुका है।’’
विदेश मंत्री ने साथ ही कहा कि कुछ हद तक द्विपक्षीय संबंध अमेरिका के भीतर के घटनाक्रमों से प्रभावित हुए हैं और उन पर उनका असर पड़ा है।
उन्होंने कहा, ‘‘कई वर्षों तक लोगों की आवाजाही को आर्थिक लाभ के रूप में देखा जाता था। आज लोगों की आवाजाही का अर्थशास्त्र और उसकी राजनीति एक-दूसरे के विपरीत हैं।’’
उन्होंने कहा कि आज विदेश नीति या कूटनीति केवल देशों, नेताओं, मंत्रियों या राजनयिकों द्वारा नहीं चलाई जाती।
उन्होंने कहा, ‘‘सोशल मीडिया के दौर में जनमत एक बड़ा कारक है’’, खासकर लोकतांत्रिक समाजों में इसका असर किस तरह सामने आता है।
गौरतलब है कि गोयल 29 सितंबर से पांच अक्टूबर तक अमेरिका की यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वह मिल्वॉकी में जी20 बैठक में शामिल होंगे और द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ चर्चा करेंगे।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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