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भारत-यूरोप समझौते का लाभ उठाने के लिए घरेलू कंपनियों को रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत: फिक्की

भारत-यूरोप समझौते का लाभ उठाने के लिए घरेलू कंपनियों को रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत: फिक्की

बर्लिन, 22 अक्टूबर । भारतीय कंपनियों को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का पूरा लाभ उठाने के लिए यूरोपीय बाजार के प्रति अधिक रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है, क्योंकि केवल शुल्क में रियायतों से निर्यात में वृद्धि नहीं होगी।

उद्योग मंडल फिक्की के महासचिव अनंत स्वरूप ने बृहस्पतिवार को कहा कि असली चुनौती बाजार तक बेहतर पहुंच को लगातार बाजार में अपनी पैठ बढ़ाने में बदलने की होगी।

उन्होंने कहा कि जनवरी में संपन्न हुआ यह समझौता भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए यूरोपीय बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का अभूतपूर्व अवसर प्रस्तुत करता है, लेकिन केवल शुल्क में रियायतों से निर्यात में वृद्धि नहीं होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजार के प्रति अधिक रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। इसमें उन उत्पादों की पहचान करना, (जिन पर शुल्क संबंधी लाभ महत्वपूर्ण हैं), यूरोपीय खरीदारों के साथ संबंध बनाना, उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर करना और यूरोपीय आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़ना शामिल है।’’

स्वरूप, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ यहां दो दिवसीय यात्रा पर पहुंचे हैं। भारत और जर्मनी के बीच व्यापार एवं निवेश संबंधों को बढ़ावा देने के लिए यह यात्रा की जा रही है। जर्मनी यूरोपीय संघ (ईयू) में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

उन्होंने कहा कि एमएसएमई बड़ी भारतीय और यूरोपीय कंपनियों के आपूर्तिकर्ता बनकर भी लाभ उठा सकते हैं। विशेष रूप से कपड़ा, चमड़ा, इंजीनियरिंग कलपुर्जे, रसायन और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे क्षेत्रों में ऐसा किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि यूरोपीय मानकों का अनुपालन निर्यात में सफलता तय करने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक बना रहेगा।

फिक्की के महासचिव ने साथ ही कहा, ‘‘भारत को विशेष रूप से प्रमुख निर्यात केंद्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त परीक्षण प्रयोगशालाओं और प्रमाणन सुविधाओं का विस्तार करना चाहिए। भारतीय और यूरोपीय अनुरूपता आकलन निकायों के बीच अधिक सहयोग से दोहराव, लागत और देरी कम करने में मदद मिल सकती है।’’

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय कंपनियों को तत्काल शुल्क संबंधी लाभों से आगे बढ़कर इस समझौते को देखना चाहिए, क्योंकि इससे भारत में यूरोपीय निवेश को बढ़ावा मिल सकता है, प्रौद्योगिकी साझेदारियों को प्रोत्साहन मिल सकता है, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण मजबूत हो सकता है और निर्यात बाजारों में विविधता लाने में मदद मिल सकती है।

भारत और यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी को मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत पूरी होने की घोषणा की थी। समझौते पर इस साल दिसंबर में हस्ताक्षर होने और इसके अगले साल लागू होने की संभावना है।

भारत का यूरोपीय संघ के देशों को निर्यात 2025-26 में 4.57 प्रतिशत घटकर 72.4 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो 2024-25 में 75.85 अरब अमेरिकी डॉलर था।

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कुल वस्तु निर्यात में इन देशों की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत थी। दूसरी ओर, इन देशों से भारत का आयात 2025-26 में नौ प्रतिशत बढ़कर 66.18 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जो 2024-25 में 60.68 अरब अमेरिकी डॉलर था।

गत वित्त वर्ष में भारत के कुल वस्तु आयात में इन देशों की हिस्सेदारी करीब नौ प्रतिशत थी।

व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में रहा। नीदरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, बेल्जियम, इटली, स्वीडन और डेनमार्क सहित यूरोप के कुछ देश भारत में प्रमुख निवेशक हैं।

सियासी मियार की रीपोर्ट