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हाथी शावक की मौत के बाद ग्रामीणों ने किया शुद्धिकरण

हाथी शावक की मौत के बाद ग्रामीणों ने किया शुद्धिकरण

रायगढ़, 02 फरवरी । छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के बंगुरसिया सर्किल क्षेत्र के बड़झरिया तालाब में दिसंबर में डूबकर मृत हुए हाथी शावक की घटना के बाद ग्रामीणों ने शनिवार को परंपरागत शुद्धिकरण एवं दशकर्म का आयोजन किया।
वन विभाग ने यह जानकारी सोमवार को दी। इस दौरान वन एवं वन्यप्राणी सुरक्षित रहें तथा भविष्य में किसी प्रकार की जनहानि न हो, इस उद्देश्य से पूजा-पाठ कर मृत्युभोज किया गया।
जानकारी के अनुसार, बंगुरसिया क्षेत्र में पिछले कुछ समय से लगभग 32 हाथियों का झुंड डेरा डाले हुए था। दिसंबर में रात के समय हाथियों का यह झुंड बड़झरिया तालाब में नहाने पहुंचा था, इसी दौरान एक नन्हा शावक गहरे पानी में डूब गया। काफी देर तक बाहर न आने पर झुंड के अन्य हाथियों ने शावक को बाहर निकालने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद हाथियों का पूरा झुंड चिंघाड़ने लगा।
हाथियों की आवाज सुनकर वन विभाग का अमला एवं ग्रामीण मौके पर पहुंचे। कड़ी मशक्कत के बाद हाथियों को तालाब क्षेत्र से दूर किया गया, जिसके पश्चात शावक के मृत होने की पुष्टि हुई। शावक की मौत के बाद भी हाथियों का झुंड कई दिनों तक आसपास के जंगलों में डटा रहा।
इस दौरान धान मंडी में रखी धान की बोरियों को भी नुकसान पहुंचाया गया। घटना के बाद क्षेत्र में शांति और शुद्धिकरण के उद्देश्य से बंगुरसिया एवं नवागांव के ग्रामीणों ने आपसी चंदा कर शनिवार को दशकर्म का आयोजन किया। बड़ी संख्या में ग्रामीण उस स्थान पर एकत्र हुए, जहां हाथी शावक की मौत हुई थी। इसके पश्चात बैगा एवं ग्रामीणों द्वारा शिव-गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन किया गया और मृत्युभोज के रूप में भोजन ग्रहण किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यह आयोजन परंपरागत मान्यताओं के अनुसार वन, वन्यप्राणी और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने तथा क्षेत्र में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से किया गया।

सियासी मियार की रीपोर्ट