पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच सीएम ममता बनर्जी का चुनाव आयोग को कड़ा पत्र, शीर्ष अधिकारियों के तबादले पर जताई हैरानी, संवैधानिक ढांचे और संघीय परंपराओं के उल्लंघन का लगाया आरोप

कोलकाता, 17 मार्च । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को हटाने के फैसले पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। ममता बनर्जी ने सोमवार रात भेजे गए इस पत्र में मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) जैसे वरिष्ठ पदों पर तैनात अधिकारियों के अचानक तबादले को ‘एकतरफा’ करार दिया। उन्होंने हैरानी जताई कि चुनाव की तारीखों के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद बिना किसी ठोस कारण या लापरवाही के आरोप के इतना बड़ा प्रशासनिक फेरबदल कैसे कर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धाराओं का उल्लेख करते हुए चुनाव आयोग को पुरानी कार्यप्रणाली की याद दिलाई। उन्होंने तर्क दिया कि पिछले चुनावों तक आयोग किसी भी बड़े अधिकारी को हटाने से पहले राज्य सरकार से तीन अफसरों का पैनल मांगता था और आपसी सलाह से निर्णय लिया जाता था। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस बार आयोग ने स्थापित संघीय ढांचे और प्रशासनिक परंपराओं को दरकिनार कर दिया है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और संस्थागत ईमानदारी पर सवाल खड़े होते हैं।
ममता बनर्जी ने आयोग से भविष्य में ऐसे कठोर और एकतरफा कदम उठाने से बचने का आग्रह किया है। उन्होंने पत्र में लिखा कि बिना किसी शिकायत के शीर्ष अधिकारियों को हटाना राज्य की प्रशासनिक संरचना को कमजोर करने जैसा है। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि इस तरह के फैसलों से न केवल चुनाव आयोग की विश्वसनीयता कम होती है, बल्कि संवैधानिक ढांचे के बुनियादी सिद्धांतों पर भी बुरा असर पड़ता है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की गहमागहमी के बीच मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख ने राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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