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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने अदालत में लगाई जबरदस्त फटकार, केस के सिलसिले में भाई को फोन करने वाले शख्स पर भड़के सीजेआई, बोले- ‘ऐसी हिम्मत दोबारा मत करना’

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने अदालत में लगाई जबरदस्त फटकार, केस के सिलसिले में भाई को फोन करने वाले शख्स पर भड़के सीजेआई, बोले- ‘ऐसी हिम्मत दोबारा मत करना’

नई दिल्ली, 26 मार्च । भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने बुधवार को एक याचिकाकर्ता के पिता के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए खुली अदालत में जमकर फटकार लगाई। मामला एक मेडिकल कॉलेज में अल्पसंख्यक कोटे के तहत दाखिले से जुड़ा था, जिसकी सुनवाई स्वयं सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही थी। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने खुलासा किया कि याचिकाकर्ता के पिता ने उनके भाई को फोन करके अदालती आदेशों और प्रक्रिया के संबंध में सवाल पूछने का दुस्साहस किया। सीजेआई ने तीखे लहजे में पूछा कि इस कृत्य के लिए आरोपी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता के वकील को संबोधित करते हुए कहा, “उनकी हिम्मत कैसे हुई मेरे भाई को फोन करने की? क्या वह मुझे हुक्म चलाएंगे या डराने की कोशिश करेंगे?” सीजेआई ने स्पष्ट किया कि वे पिछले 23 वर्षों से ऐसे तत्वों से निपट रहे हैं और जो कोई भी न्यायपालिका को प्रभावित करने या धमकी देने की कोशिश करेगा, उससे सख्ती से निपटा जाएगा। अदालत ने वकील को यह भी सुझाव दिया कि यदि उनका मुवक्किल इस तरह का अनुचित व्यवहार कर रहा है, तो एक पेशेवर के नाते उन्हें इस केस से हट जाना चाहिए। हालांकि, वकील ने अनभिज्ञता जताते हुए तुरंत माफी मांग ली।

यह पूरा विवाद दो सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों से जुड़ा है, जिन्होंने कथित तौर पर बौद्ध धर्म अपनाकर अल्पसंख्यक कोटे के तहत मेडिकल दाखिला लेने का प्रयास किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस कदम को ‘धोखाधड़ी का एक तरीका’ करार दिया और कहा कि ऐसे प्रयास वास्तविक अल्पसंख्यक उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन करते हैं। पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि केवल आरक्षण का लाभ लेने के लिए धर्म परिवर्तन करना स्वीकार्य नहीं है। फिलहाल, कोर्ट ने इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए पुन: सूचीबद्ध किया है, लेकिन याचिकाकर्ता के परिवार की इस हरकत ने कानूनी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

सियासी मियार की रीपोर्ट