ऊर्जा संकट के बीच ईरान का ऐतिहासिक फैसला, भारत समेत मित्र देशों के लिए खुला ‘होर्मुज मार्ग’, वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल-गैस आपूर्ति को मिलेगी बड़ी संजीवनी

तेहरान, 26 मार्च । पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच ईरान ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम उठाया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को औपचारिक घोषणा की है कि रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को भारत समेत सभी मित्र देशों के जहाजों के लिए फिर से खोल दिया गया है। 26 मार्च 2026 को लिया गया यह फैसला वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी राहत माना जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा तेल, गैस और उर्वरकों की वैश्विक आपूर्ति ठप होने की चेतावनी के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने यह उदारता दिखाई है।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों को ‘मित्र देश’ की श्रेणी में रखा गया है, जिनके वाणिज्यिक जहाजों को अब इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति होगी। हालांकि, ईरान की रक्षा परिषद ने इसके लिए कुछ कड़े नियम और शर्तें भी लागू की हैं। मार्ग का उपयोग करने वाले जहाजों को ईरानी नौसेना या आईआरजीसी (IRGC) अधिकारियों के साथ अनिवार्य समन्वय करना होगा। साथ ही, यह स्पष्ट कर दिया गया है कि अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाजों के लिए यह मार्ग अभी भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और केवल गैर-शत्रुतापूर्ण जहाजों को ही प्रवेश दिया जाएगा।
भारत के लिए होर्मुज मार्ग का खुलना किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि भारत अपनी कच्चा तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से आयात करता है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और एक-तिहाई एलएनजी (LNG) इसी ‘ऑयल चोकपॉइंट’ से गुजरती है। इस मार्ग के बहाल होने से भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में स्थिरता आने की प्रबल उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह कदम वैश्विक दबाव को कम करने और अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने की कोशिश है, जिससे भारत जैसे देशों को अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने का एक बड़ा अवसर मिला है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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