पाकिस्तानी सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने यूएई को ‘असहाय’ बताकर उड़ाया मजाक, भारी भारतीय आबादी को बताया संप्रभुता के लिए खतरा और ‘अखंड भारत’ से रहने को कहा सावधान

नई दिल्ली, पाकिस्तान के वरिष्ठ सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को लेकर एक बेहद विवादास्पद बयान दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में दरार आ सकती है। एक साक्षात्कार के दौरान हुसैन ने यूएई को “फंसा हुआ और असहाय” बताते हुए कहा कि संकट के इस दौर में अरबों डॉलर का कर्ज चुकाना पाकिस्तान का वित्तीय दायित्व नहीं, बल्कि एक “जरूरतमंद भाई” की मदद करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूएई ने अमेरिका को भारी धनराशि दी और यमन व सूडान जैसे युद्धों में फंसकर अपने संसाधन खत्म कर लिए हैं। पाकिस्तान द्वारा 3.5 अरब डॉलर का कर्ज वापस किए जाने को उन्होंने आर्थिक मजबूरी के बजाय पाकिस्तान की “नैतिक और ऐतिहासिक श्रेष्ठता” के रूप में पेश करने की कोशिश की।
सीनेटर हुसैन ने यूएई को ‘भाईचारे वाली सलाह’ देते हुए वहां रह रहे भारतीय प्रवासियों की बड़ी संख्या पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि यूएई की कुल आबादी में से 43 लाख लोग भारतीय हैं, जो भविष्य में वहां की संप्रभुता के लिए खतरा बन सकते हैं। हुसैन ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि भारत के साथ यूएई के बढ़ते घनिष्ठ संबंध कहीं उसे ‘अखंड भारत’ का हिस्सा न बना दें। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब खाड़ी देश अपनी विदेश नीति को अधिक व्यावहारिक बना रहे हैं और पाकिस्तान से अपने पुराने ऋणों की वापसी की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तान में इस बयान को अपनी आर्थिक कमजोरी छुपाने के लिए राष्ट्रवाद का सहारा लेने के तौर पर देखा जा रहा है।
पाकिस्तान सरकार इस महीने के अंत तक यूएई को 3.5 अरब डॉलर का कर्ज लौटाने की तैयारी कर रही है। हालांकि, अधिकारियों ने इसे “राष्ट्रीय गरिमा” का मामला बताया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी रकम चुकाने से पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 18 प्रतिशत तक गिर सकता है। वर्तमान में पाकिस्तान आईएमएफ (IMF) के कार्यक्रम का हिस्सा है और उसे अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए चीन और सऊदी अरब जैसे देशों से लगातार वित्तीय सहायता की आवश्यकता है। एक तरफ जहां पाकिस्तान का वित्त मंत्रालय स्थिरता का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सीनेटरों के ऐसे विवादास्पद बयान उसके प्रमुख सहयोगी देशों के साथ संबंधों को और अधिक जटिल बना सकते हैं।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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