पुणे पुलिस की नाकामी के चलते ‘शांत क्षेत्र’ में तेज़ आवाज़ वाला डीजे, डुंबाले खटखटाएंगे उच्च न्यायालय का दरवाजा

पुणे, 15 अप्रैल । महाराष्ट्र के पुणे में अंबेडकरवादी कार्यकर्ता राहुल डुंबले ने आरोप लगाया है कि भले ही डॉ. बाबासाहेब बी.आर. अंबेडकर की जयंती समारोह के दौरान डीजे पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन मंगलवार को ससून अस्पताल क्षेत्र में “पुणे पुलिस की खराब योजना के कारण” तेज आवाजज में संगीत बजाया गया।
श्री डुंबले ने इस मुद्दे पर पुलिस प्रशासन की कड़ी निंदा की है और चेतावनी दी है कि वह इस लापरवाही के खिलाफ बॉम्बे उच्च न्यायालय का रुख करेंगे।
ससून अस्पताल को शांत क्षेत्र घोषित किए जाने के बावजूद, वहां 124 डेसिबल की तीव्रता पर डीजे संगीत बजाया गया। उन्होंने कहा, “लगातार तीन दिनों 12, 13 और 14 अप्रैल तक लिखित शिकायतें देने के बाद भी, पुलिस कोई निवारक कार्रवाई करने में विफल रही। इस अक्षमता के कारण, मरीज़ों की जान जोखिम में डाली जा रही है।
केंद्रीय जयंती समिति ने इस वर्ष एक ऐतिहासिक “नो डीजे निर्णय लेकर एक मिसाल कायम की थी। हालाँकि, पुलिस की लापरवाही के कारण, कुछ तत्वों ने इस सुधारवादी पहल को कमज़ोर कर दिया है। श्री डुंबले ने कहा, “पुलिस ने बाबासाहेब के आदर्शों को बढ़ावा देने के बजाय, शोर-शराबा करने वालों को इतनी खुली छूट क्यों दी?”
शोर प्रदूषण के संबंध में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा जारी स्पष्ट आदेशों की अनदेखी की जा रही है। पुलिस एक साइलेंस ज़ोन में मरीज़ों के स्वास्थ्य को खतरे में डालने वाली कार्रवाइयों पर आँखें मूंदे हुए है। श्री डुंबले ने कहा, “हम इस पूरी घटना के सबूतों और पुलिस को की गई शिकायतों की प्रतियों के साथ उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करेंगे।”
गौरतलब है कि 124 डीबी का शोर ससून अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती मरीज़ों के लिए अत्यंत हानिकारक है। श्री डुंबले ने कहा कि यदि इस शोर के कारण मरीज़ों को कोई कष्ट होता है, तो इसकी पूरी ज़िम्मेदारी पुलिस प्रशासन को लेनी होगी।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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