चीन ने मिसाइल इस्तेमाल को लेकर जापान को चेताया

बीजिंग, 07 मई । चीन ने बुधवार को संयुक्त समुद्री अभ्यास के दौरान जापान के ‘टाइप 88’ मिसाइलों के परीक्षण की तीखी आलोचना की और चेतावनी दी कि उसका यह कदम दूसरे विश्व युद्ध के बाद की उसकी सुरक्षा नीति से एक खतरनाक भटकाव है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने एक नियमित प्रेस वार्ता में जापान को “आक्रामक” बताते हुए कहा कि वह अपने ऐतिहासिक अपराधों पर गहराई से विचार करने में विफल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जापान सुरक्षा सहयोग के बहाने विदेशों में सैन्य बल भेज रहा है और आक्रामक मिसाइलें दाग रहा है। उनका कहना है कि यह कदम जापान के दक्षिणपंथी गुटों द्वारा देश के “पुनः सैन्यीकरण” को बढ़ावा देने की कोशिशों का हिस्सा है।
श्री लिन ने कहा कि संयुक्त अभ्यास के दौरान आक्रामक मिसाइलों का इस्तेमाल जापान की “सिर्फ रक्षा-उन्मुख नीति” का उल्लंघन है और इससे क्षेत्र में “नव-सैन्यवाद” के उभरने की गंभीर चिंता पैदा हुई है। उन्होंने जापान से अपने सैन्यवादी अतीत से सबक लेने, अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने और सैन्य व सुरक्षा क्षेत्रों में संयम बरतने का आग्रह किया।
उल्लेखनीय है कि जापान के आत्मरक्षा बलों ने बुधवार को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और फिलीपींस के साथ संयुक्त समुद्री अभ्यास के दौरान ‘टाइप 88’ एंटी-शिप मिसाइल दागी थी, जिसने दक्षिण चीन सागर के पास फिलीपींस के एक पुराने नौसैनिक जहाज को निशाना बनाया। यह अभ्यास ऐसे समय में हुआ है जब मनीला और टोक्यो रक्षा उपकरणों की खरीद-बिक्री पर बातचीत कर रहे हैं।
एक अन्य मामले में चीन ने उन ब्रिटिश प्रतिबंधों की भी आलोचना की जो रूस को ड्रोन पुर्जे आपूर्ति करने के आरोप में चीनी कंपनियों पर लगाए गए हैं। लिन ने कहा कि चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है और इस पर लंदन के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है। उन्होंने कहा कि चीन अपने व्यवसायों के वैध अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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