ओटीटी से फिल्म ‘सतलुज’ को हटाने पर मचा विवाद, बिना सेंसर सर्टिफिकेट के भी आईटी नियमों के दायरे में आती है सामग्री
हैदराबाद, । मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ को रिलीज के महज 48 घंटों के भीतर ZEE5 से हटा दिया गया। हालांकि भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड (CBFC) से प्रमाणन अनिवार्य नहीं है, लेकिन इसे सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 के तहत सख्त दिशानिर्देशों का पालन करना होता है। सरकार ने सुरक्षा चिंताओं और कानूनी नियमों का हवाला देते हुए इसे हटाने का निर्देश दिया था, जिसके बाद प्लेटफॉर्म ने तकनीकी कारणों का उल्लेख करते हुए फिलहाल इसे स्ट्रीमिंग से हटा लिया है।
भारत में ऑनलाइन कंटेंट के लिए कड़े नियम
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा निर्धारित आईटी नियमों के भाग III के तहत, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए एक सख्त ‘आचार संहिता’ का पालन करना अनिवार्य है। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य अश्लील सामग्री, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा, या अवैध कंटेंट के प्रकाशन पर रोक लगाना है। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को न केवल अपनी सामग्री को आयु-उपयुक्त श्रेणियों में वर्गीकृत करना होता है, बल्कि किसी भी आपत्तिजनक या गैरकानूनी सामग्री को शिकायत मिलने के बाद तय समयसीमा के भीतर हटाना भी कानूनी रूप से आवश्यक होता है।
त्रिस्तरीय निगरानी और शिकायत निवारण प्रणाली
सरकार ने कंटेंट की निगरानी के लिए त्रिस्तरीय प्रणाली लागू की है, जिसमें पहला स्तर प्लेटफॉर्म का स्व-नियमन, दूसरा स्वतंत्र स्व-विनियमन निकाय और तीसरा केंद्र सरकार का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप है। नियमों के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक शिकायत पर प्लेटफॉर्म को 72 घंटों के भीतर और गंभीर उल्लंघन (जैसे नग्नता या निजता का हनन) के मामले में 24 घंटों के भीतर कार्रवाई करनी होती है। ‘सतलुज’ के मामले में भी इन्हीं प्रावधानों के तहत सरकारी आदेशों का पालन करते हुए प्लेटफॉर्म को फिल्म को वापस लेना पड़ा है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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