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नेपाल चुनाव : प्रधानमंत्री देउबा की नेपाली कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, युवाओं ने मारी बाजी…

नेपाल चुनाव : प्रधानमंत्री देउबा की नेपाली कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, युवाओं ने मारी बाजी…

काठमांडू, 28 नवंबर। नेपाल के संसदीय चुनाव में प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की सत्तारूढ़ नेपाली कांग्रेस अब तक सामने आए नतीजों में 53 सीटें जीत दर्ज करके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं चुनाव में युवाओं ने राजनीतिक दिग्गजों को पटखनी देते हुए बड़ी संख्या में सीटों पर जीत दर्ज की है।

नेपाल की 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा की 165 सीट का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान से जबकि शेष 110 सीट का चुनाव आनुपातिक चुनाव प्रणाली के जरिए होता है। प्रतिनिधि सभा और सात प्रांतीय विधानसभाओं के चुनाव 20 नवंबर को हुए थे। मतों की गिनती सोमवार को शुरू हुई थी।

नेपाली कांग्रेस ने प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के तहत अकेले 53 सीट जीती हैं जबकि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) ने 42 सीट पर जीत दर्ज की है। इसके अलावा, सीपीएन-माओवादी सेंटर 17 सीट जीतकर तीसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी है जबकि सीपीएन-यूनिफाइड सोशलिस्ट ने 10 सीट जीती हैं।

नवगठित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने सात-सात सीटों पर कब्जा जमाया है। निर्दलीय उम्मीदवारों एवं अन्य छोटे दलों के खाते में 21 सीट गई हैं। 165 सीट में से आठ के नतीजे आने बाकी हैं।

पांच दलों के सत्तारूढ़ गठबंधन ने 85 सीटों पर जीत हासिल की हैं जबकि सीपीएन-यूएमएल के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 55 सीट पर कब्जा जमाया है।

प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष देउबा के अलावा, तीन पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड, ओली और माधव नेपाल भी संसद के लिए चुने गए हैं।

युवाओं ने मारी बाजी, मंत्रियों और 60 सांसदों सहित कई वरिष्ठ नेता हारे

नेपाल के संसदीय चुनावों में मंत्रियों और 60 मौजूदा सांसदों सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के कई वरिष्ठ नेताओं को शिकस्त का सामना करना पड़ा है, जबकि युवाओं ने जीत दर्ज की है।

मधेस (तराई) क्षेत्र आधारित दलों के दो वरिष्ठ नेता चुनाव हार गए, जिनमें जनता समाजवादी पार्टी के प्रमुख उपेंद्र यादव और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र महतो शामिल हैं।

देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) (सीपएन-यूएमएल) से चुनाव हारने वालों में पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ईश्वर पोखरेल, उपाध्यक्ष सुरेंद्र पांडे, महासचिव शंकर पोखरेल और उप महासचिव प्रदीप गयावली शामिल हैं।

शिकस्त का सामना करने वाले अन्य शीर्ष नेताओं में सीपीएन माओइस्ट-सेंटर के महासचिव देव गुरुंग, उप महासचिव और ऊर्जा मंत्री पम्पा भुशाल और उप महासचिव गिरिराजमणि पोखरेल शामिल हैं।

गृह मंत्री और नेपाली कांग्रेस के नेता बालकृष्ण खांड और मौजूदा सरकार में पर्यटन एवं नागर विमानन मंत्री जीवन राम श्रेष्ठ भी चुनाव हार गए।

पूर्व प्रधानमंत्री एवं सीपीएन-यूनिफाइड सोशलिस्ट के वरिष्ठ नेता झालानाथ खनल और पूर्व विदेश मंत्री एवं नेपाली कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सुजाता कोइराला को भी चुनाव में शिकस्त मिली है।

कई युवा और नए चेहरे प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए हैं। पूर्व टीवी पत्रकार रवि लमीछाने द्वारा महज छह महीने पहले गठित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने प्रत्यक्ष चुनाव में सात सीट पर जीत दर्ज की और आनुपातिक पद्धति के तहत 10 लाख से अधिक वोट हासिल किए हैं।

सत्तारूढ़ गठबंधन ने 85 सीट पर जीत दर्ज की। यह पांच दलों का गठबंधन है। वहीं, सीपीएन-यूएमएल नीत गठजोड़ ने 55 सीट पर जीत दर्ज की।

उल्लेखनीय है कि 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में, 165 सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान से किया जा रहा, जबकि शेष 110 को आनुपातिक प्रणाली से चुना जा रहा। स्पष्ट बहुमत के लिए किसी पार्टी या गठबंधन को 138 सीट की जरूरत होगी।

सियासी मियार की रिपोर्ट…