डिजिटल क्रांति में भारत ने रचा नया इतिहास, देश के 57% लेनदेन के साथ कैश को पछाड़कर यूपीआई बना नंबर-1 पेमेंट मोड

नई दिल्ली, 18 फरवरी । भारत में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक युगांतकारी परिवर्तन हुआ है। वित्त मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (UPI) अब देश का सबसे पसंदीदा भुगतान माध्यम बन गया है, जिसकी कुल लेनदेन में हिस्सेदारी 57 प्रतिशत तक पहुँच गई है। इसके विपरीत, कभी बाजार पर राज करने वाला नकद (Cash) लेनदेन अब सिमटकर मात्र 38 प्रतिशत रह गया है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब तेजी से ‘कैशलेस’ भविष्य की ओर अग्रसर है।
डिजिटल इंडिया की इस सफलता के पीछे युवाओं और छोटे व्यापारियों का अटूट विश्वास है। आंकड़ों के मुताबिक, 18 से 25 वर्ष के 66 प्रतिशत युवा केवल डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं। वहीं, देश के 94 प्रतिशत छोटे व्यापारियों ने यूपीआई को अपना लिया है, जिनमें से आधे से अधिक का मानना है कि इससे उनकी बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। त्वरित भुगतान और पारदर्शी रिकॉर्ड-कीपिंग ने व्यापारियों के लिए व्यापार करना पहले से कहीं अधिक सुगम बना दिया है।
सरकार द्वारा प्रदान किए गए ₹8,276 करोड़ के बजटीय सहयोग ने इस बदलाव को नई गति दी है। यूपीआई क्यूआर कोड (QR Code) की संख्या में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है, जो 9.3 करोड़ से बढ़कर अब 65.8 करोड़ के पार पहुँच गई है। सक्रिय बैंकों की संख्या भी बढ़कर 661 हो गई है। इस बुनियादी ढांचे के विस्तार का ही परिणाम है कि अब 90 प्रतिशत भारतीय उपभोक्ताओं का डिजिटल भुगतान पर भरोसा बढ़ा है, जिससे एटीएम (ATM) से पैसे निकालने की निर्भरता में बड़ी कमी आई है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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