‘आत्मनिर्भरता’ के प्रयासों के बावजूद भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता बढ़ी: जयराम रमेश

नई दिल्ली, 27 मार्च । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को ऊर्जा आयात पर बढ़ती निर्भरता को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में देश प्रमुख ईंधन क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता से और दूर चला गया है। श्री रमेश ने एक बयान में कहा कि 2014-15 से 2024-25 के बीच कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता 84 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसी अवधि में एलपीजी आयात पर निर्भरता 46 प्रतिशत से बढ़कर 62 प्रतिशत तक पहुंच गई है।उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “यह सब तब हो रहा है जब नारा आत्मनिर्भरता का दिया गया था।”
कांग्रेस नेता ने कहा कि देश में प्राकृतिक गैस उत्पादन की स्थिति “और भी अस्पष्ट” बनी हुई है, जिसे उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान किए गए दावों से जोड़ा। उन्होंने याद दिलाया कि 26 जून 2005 को श्री मोदी ने घोषणा की थी कि गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (जीएसपीसी) ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन के गहरे समुद्र में देश के सबसे बड़े गैस भंडार की खोज की है, जिसे भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने वाला बताया गया था। श्री रमेश ने हालांकि यह आरोप लगाया कि बाद की जांचों में ये दावे गलत साबित हुए। उन्होंने कहा, “2011 से 2016 के बीच कैग की पांच रिपोर्टों में इसे 20,000 करोड़ रुपये का घोटाला बताया गया।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अगस्त 2017 में जीएसपीसी का ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन में विलय कर इस मुद्दे को “दबा दिया गया।” उन्होंने टिप्पणी की, “मोदी द्वारा जिस गैस का बड़े स्तर पर वादा किया गया था, वह केवल ‘गैस’ ही बनकर रह गई।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश की ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता को लेकर राजनीतिक बहस तेज है, खासकर तब जब बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत अभी भी विदेशी स्रोतों पर काफी हद तक निर्भर है। दूसरी ओर, सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने, ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और दीर्घकालिक रणनीति के तहत नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसे कदमों का लगातार उल्लेख करती रही है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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