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अमेरिका ने तैयार किया खतरनाक ‘ब्लैकआउट बम’, बिना खूनखराबे के ईरान की बिजली आपूर्ति ठप करने की क्षमता, ग्रेफाइट फिलामेंट्स से ग्रिड फेल करने में है माहिर

अमेरिका ने तैयार किया खतरनाक ‘ब्लैकआउट बम’, बिना खूनखराबे के ईरान की बिजली आपूर्ति ठप करने की क्षमता, ग्रेफाइट फिलामेंट्स से ग्रिड फेल करने में है माहिर

हैदराबाद,अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के ‘ब्लैकआउट बम’ (BLU-114/B) ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। इसे ‘सॉफ्ट बम’ भी कहा जाता है क्योंकि यह इमारतों या इंसानों को शारीरिक नुकसान पहुँचाए बिना केवल दुश्मन देश के बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाता है। यह हथियार विस्फोटकों के बजाय रासायनिक रूप से उपचारित ‘कार्बन ग्रेफाइट फिलामेंट्स’ का उपयोग करता है। जब इसे लक्ष्य पर गिराया जाता है, तो यह हवा में ही मकड़ी के जाले की तरह फैल जाता है और बिजली के ट्रांसफॉर्मर व हाई-वोल्टेज लाइनों पर गिरकर शॉर्ट-सर्किट पैदा कर देता है। इससे पल भर में पूरे शहर या देश की बत्ती गुल हो सकती है, जबकि भौतिक बुनियादी ढांचा काफी हद तक सुरक्षित रहता है।

ब्लैकआउट बम का इस्तेमाल अमेरिका पहले भी युद्धों के दौरान प्रभावी ढंग से कर चुका है। 1991 के खाड़ी युद्ध में, अमेरिकी नौसेना ने टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों के जरिए इराक पर ग्रेफाइट फिलामेंट्स गिराए थे, जिससे मात्र 24 घंटों के भीतर इराक की 85 प्रतिशत बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी। इसी तरह, 1999 में सर्बिया के खिलाफ ऑपरेशन एलाइड फोर्स के दौरान, अमेरिकी एफ-117 लड़ाकू विमानों ने इन बमों का प्रयोग कर सर्बिया की 70 प्रतिशत बिजली सप्लाई काट दी थी। इन कार्रवाइयों ने दुश्मन सरकारों पर भारी मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया और उनकी सैन्य क्षमताओं को पंगु कर दिया, जिससे बिना किसी बड़े नरसंहार के युद्ध की दिशा बदल गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के विशाल बिजली ग्रिड को ठप करना अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है। ईरान में लगभग 130 थर्मल पावर प्लांट हैं जिनकी क्षमता 78,000 मेगावाट है और ये एक बड़े भूभाग में फैले हुए हैं। हालांकि, ईरान का ग्रिड पहले से ही बिजली की कमी और तकनीकी समस्याओं से जूझ रहा है, जिससे ‘ब्लैकआउट बम’ का प्रभाव और भी घातक हो सकता है। अमेरिकी वायुसेना के सीबीयू-94 वेपन सिस्टम के जरिए बी-2 या एफ-35 जैसे आधुनिक विमानों से इन बमों को सटीक निशाना बनाकर गिराया जा सकता है। यह तकनीक युद्ध के मैदान में बिना किसी ‘कोलेटरल डैमेज’ के दुश्मन को घुटनों पर लाने का एक आधुनिक तरीका बन गई है।

सियासी मियार की रीपोर्ट