वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार: वित्त वर्ष 2026 में 7.5% जीडीपी वृद्धि का अनुमान

हैदराबाद, 13 मई दुनिया भर में गहराते आर्थिक संकट और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। एसबीआई रिसर्च की नवीनतम “इकोरैप” रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में भारत की रियल जीडीपी वृद्धि दर 7.2% रहने की उम्मीद है, जिससे पूरे साल की कुल वृद्धि दर 7.5% तक पहुँच सकती है। रिपोर्ट “भारतीय असाधारणता” पर जोर देती है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा वैश्विक विकास अनुमान घटाने के बाद भी घरेलू मांग और ग्रामीण क्षेत्रों में आए सुधार ने भारत को बाहरी झटकों से सुरक्षित रखा है।
आर्थिक विकास की इस तेज रफ्तार का श्रेय खपत में आई जबरदस्त वृद्धि और बैंक क्रेडिट में आए उछाल को दिया जा रहा है। वित्त वर्ष 2026 में बैंक क्रेडिट ग्रोथ 16.1% के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गई है, जो व्यवसायों और उपभोक्ताओं के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण मांग अब एक मजबूत नींव पर खड़ी है, जिसे बेहतर खेती और गैर-कृषि गतिविधियों से समर्थन मिला है। इसके अलावा, शहरी खपत में भी निरंतर बढ़त देखी जा रही है, जिससे भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
सकारात्मक अनुमानों के बीच एसबीआई रिसर्च ने भविष्य के जोखिमों के प्रति आगाह भी किया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें ($105+ प्रति बैरल) और डॉलर के मुकाबले रुपये का गिरता स्तर भारत के $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य में देरी कर सकते हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वैल्यू चेन में तेजी से शामिल होना होगा। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर 6.6% रहने का अनुमान जताया गया है, जिसे बनाए रखने के लिए सरकार को निर्यात और मुद्रा स्थिरता पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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