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फियो ने निर्यात इकाइयों में ही जांच प्रयोगशालाओं के लिए सरकार से मदद मांगी

फियो ने निर्यात इकाइयों में ही जांच प्रयोगशालाओं के लिए सरकार से मदद मांगी

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर । भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) ने रविवार को सरकार से निर्यातकों को नियामकीय मंजूरी के अधीन अपने कारखानों में ही उत्पादों की जांच के लिए प्रयोगशालाएं स्थापित करने में मदद देने का आग्रह किया।

संगठन ने कहा कि इससे प्रमाणन की प्रक्रिया तेज होगी और निर्यात खेप समय पर भेजने में मदद मिलेगी।

फियो के अध्यक्ष एस. सी. रल्हन ने कहा कि मंजूर व्यवस्था के तहत निर्यातकों को अपने परिसर में उत्पादों की जांच की अनुमति देने से साझा जांच केंद्रों पर निर्भरता कम होगी और कंपनियां विदेशी बाजारों में खरीदारों को तय समयसीमा के भीतर आपूर्ति कर सकेंगी।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत जिस संख्या में मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को लागू कर रहा है, उसे देखते हुए यह हमारे लिए महत्वपूर्ण है।’’

उन्होंने कहा कि उत्पादों को साझा जांच केंद्रों में भेजने से अक्सर देरी होती है, खासकर तब जब किसी केंद्र को कई कंपनियों के उत्पादों की जांच करनी हो।

रल्हन ने कहा, ‘‘देरी से निर्यात खेप प्रभावित हो सकती है और कारोबारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय खरीदारों द्वारा तय समयसीमा के भीतर आपूर्ति करना मुश्किल हो सकता है।’’

उन्होंने कहा कि साझा केंद्रों के इस्तेमाल से उत्पादों के डिजाइन और विनिर्माण प्रक्रियाओं की गोपनीयता को लेकर भी चिंता हो सकती है, क्योंकि कंपनियां अपने संवेदनशील उत्पादों या तकनीकी जानकारी को बाहरी केंद्रों के सामने रखने से हिचक सकती हैं।

उन्होंने कहा कि बाहरी केंद्रों पर जांच का शुल्क भी अधिक होता है, जिससे उत्पाद की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होती है।

रल्हन ने कहा, ‘‘शुल्क सालाना 10-12 लाख रुपये तक होता है।’’

उन्होंने कहा कि सरकार से मंजूरी प्राप्त कारखानों में ही उत्पादों की जांच की सुविधा से इन चिंताओं को दूर करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि उत्पाद आयातक देशों के गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर खरे उतरें।

वैश्विक उदाहरण देते हुए फियो अध्यक्ष ने कहा कि अमेरिका की कंपनियों को अपने यहां उत्पादों की जांच की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

सियासी मियार की रीपोर्ट