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वित्त मंत्रालय का अखिलेश यादव को जवाब, सरकारी बैंकों ने कमाया रिकॉर्ड मुनाफा

वित्त मंत्रालय का अखिलेश यादव को जवाब, सरकारी बैंकों ने कमाया रिकॉर्ड मुनाफा

नई दिल्ली, वित्त मंत्रालय ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों पर पलटवार करते हुए शुक्रवार को कहा कि सरकार के लगातार हस्तक्षेप और बैंकिंग सुधारों के चलते सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सर्वाधिक 1.98 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया।

वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि इससे पीएसबी की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) घटकर कई दशकों के निचले स्तर 1.93 प्रतिशत पर आ गई।

मंत्रालय ने यादव के उस आरोप के जवाब में यह पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार ने बैंकिंग व्यवस्था को सूदखोरी से भी ज्यादा खराब बना दिया है।

यादव ने बृहस्पतिवार को 2014 से बैंकिंग सुधारों को संभालने के तरीके को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुवाई वाली सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने न्यूनतम शेष राशि नहीं रखने पर जुर्माने, नोटबंदी, सेवा शुल्क, कर्ज माफी, ऋण तक पहुंच और बैंक कर्मचारियों के साथ व्यवहार सहित कई मुद्दों पर सवाल उठाए थे।

न्यूनतम शेष राशि नहीं रखने पर लगने वाले शुल्क के बारे में वित्त मंत्रालय ने कहा कि वित्तीय समावेश के उद्देश्य और ग्राहक-केंद्रित बैंकिंग व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ते हुए अधिकांश पीएसबी ने अपने सामान्य बचत खातों में न्यूनतम शेष राशि नहीं रखने पर लगने वाले शुल्क या तो पूरी तरह माफ कर दिए हैं या कम कर दिए हैं।

मंत्रालय ने वसूली एजेंट के व्यवहार के बारे में कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे ग्राहकों को डरा-धमका या परेशान नहीं कर सकते।

पोस्ट में कहा गया है कि प्रत्येक नागरिक तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए पांच किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं। इससे देश के सभी गांव बैंकिंग केंद्रों से जुड़ गए हैं।

नोटबंदी के बारे में मंत्रालय ने कहा कि यह एक आर्थिक निर्णय था, जिसे काले धन, जाली मुद्रा और अवैध सीमा पार वित्तपोषण पर अंकुश लगाने के लिए महत्वपूर्ण माना गया था।

मंत्रालय के मुताबिक, इससे अधिक लेनदेन औपचारिक वित्तीय व्यवस्था के दायरे में आए और यूपीआई जैसी डिजिटल भुगतान प्रणालियों को अपनाने को भी बढ़ावा मिला।

उसने कहा कि आर्थिक गतिविधियों को औपचारिक स्वरूप देने और डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार करने से नोटबंदी ने भारत की विशाल असंगठित अर्थव्यवस्था को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में मदद की और दीर्घकालिक पारदर्शिता को बढ़ावा दिया।

बैंक के लॉकरों में रखी कीमती धातुओं, निवेश प्रमाणपत्रों और अन्य विरासत में मिली वस्तुओं के गायब होने के आरोप पर मंत्रालय ने कहा कि लॉकर में रखी वस्तुओं का खोना एक असाधारण घटना है। यदि बैंक की सेवा में कमी के कारण ऐसा होता है, तो बैंक ग्राहक को मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी है।

मंत्रालय ने कहा कि आरबीआई के मौजूदा नियमों के तहत यह मुआवजा सालाना लॉकर किराये का 100 गुना तक हो सकता है।

वित्त मंत्रालय ने यह भी कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार की ओर से किए गए नियामकीय बदलावों, शासन संबंधी उपायों और संरचनात्मक सुधारों से बैंकों की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है।

उसने कहा कि इन सुधारों से बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है, ऋण अनुशासन और जोखिम प्रबंधन बेहतर हुआ है, बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बढ़ी है और ग्राहक सेवा में सुधार आया है।

मंत्रालय के अनुसार, 31 मार्च, 2026 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात घटकर 1.93 प्रतिशत रह गया था, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में उनका कुल कारोबार 283 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

सियासी मियार की रीपोर्ट