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तीन फीसदी भी स्वयंसेवक बनें, तो समाज में आ सकता है सकारात्मक बदलाव : सुनील आंबेकर

तीन फीसदी भी स्वयंसेवक बनें, तो समाज में आ सकता है सकारात्मक बदलाव : सुनील आंबेकर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने रविवार को ‘दिल्ली महोत्सव 2026’ में हिस्सा लिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यात्रा पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि अगर तीन फीसदी भी स्वयंसेवक बनें, तो समाज में वातावरण बदला जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान सुनील आंबेकर ने संघ के 100 साल की यात्रा पर कहा, “संघ संस्थापक हेडगेवार का पूरा जीवन राष्ट्रीयता के साथ जुड़ा हुआ है। हेडगेवार के विचार थे कि आजादी के बाद भी देश की स्वाधीनता बनी रहे और राष्ट्र वैभव तक पहुंचे। उन्होंने तय किया था कि राष्ट्र प्रथम है और उसके लिए हम सभी को काम करना होगा। हमें उत्तम लोग तैयार करने होंगे और सारे हिंदू समाज को एकजुट करना है। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक की स्थापना की।”

सुनील आंबेकर ने कहा, “हेडगेवार ने शाखा पद्धति तैयार की और संगठन के लिए अनुशासन के नियम बनाए। उनकी दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता का उदाहरण है कि वह अगले 54 साल के लिए गुरु गोलवलकर और बालासाहेब देवरस के रूप में खुद लीडरशिप तैयार करके गए, जो बहुत कठिन होता है। हेडगेवार ऐसा संगठन तैयार करके गए, जहां राजनीतिक अनुकूलता और विपरीतता, दोनों परिस्थितियों में संघ की शाखाएं निश्चित रूप से लगती हैं। यही कारण है कि संघ चलता रहा है और 100 साल का सफर तय किया है। आने वाले समय में जब तक देश को इसकी आवश्यकता रहेगी, संघ चलता रहेगा।”

संघ शाखाओं के बारे में भी सुनील आंबेकर ने विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं से जीवन के बहुत सारे मूल्य जुड़ते हैं। एक घंटे की शाखाओं में स्थानीय लोग जुटते हैं, व्यायाम करते हैं, चर्चाएं होती हैं और महापुरुषों के जीवन को याद करते हैं।

उन्होंने बताया कि शाखाओं में अनुशासन का अभ्यास कराया जाता है। विशेष रूप से भगवा ध्वज के सामने हर रोज संकल्प लेने वाली एक प्रार्थना की जाती है। संकल्प यह लिया जाता है कि ‘मैं एक ऐसा व्यक्ति बन जाऊं, जैसा देश और समाज के लिए आवश्यक है। मेरा यह संकल्प लगातार चलता रहे, जिसमें मुझे देश को परम वैभव पर ले जाना है। यही शाखा का स्वरूप है, जो हर उम्र के लिए फिट होता है।’

आंबेकर ने बताया कि देशभर में 87 हजार से अधिक रोजाना लगने वाली शाखाएं हैं। 32 हजार शाखाएं ऐसी हैं, जो सप्ताह में एक बार लगती हैं। इसी तरह सुबह-शाम के समय अलग-अलग शाखाएं लगती हैं। उन्होंने आगे कहा, “बहुत लोग संघ की विचारधारा को मानते हैं, तो कई लोग संघ के कार्यों में सहयोग करते हैं। मैं कहूंगा और डॉक्टर हेडगेवार ने भी संकल्प करते हुए कहा था कि अगर शहरों और गांवों में एक से तीन फीसदी भी स्वयंसेवक बनते हैं तो समाज में हम जो वातावरण लाना चाहते हैं, वो ला सकते हैं।”

सियासी मियार की रीपोर्ट