विपक्ष की राजनीति पर ‘व्यक्तिगत स्वार्थ हावी’: मोदी

नई दिल्ली, 24 मार्च प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रस की राजनीति की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि “जब राजनीति में व्यक्तिगत स्वार्थ हावी हो जाता है, तब लोग देश के फ्यूचर ( भविष्य) के बजाय अपने भविष्य के बारे में सोचते हैं।”
श्री मोदी ने कहा कि 2004-10 के बीच कांग्रेस के नेतृत्ववाली गठबंधन सरकार के सत्ता की चिंता वाली राजनीति का देश को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा और उस समय के नुकसान को उनकी सरकार को आज तक भरना पड़ रहा है। उन्होंने एक समाचार चैनल के संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल सरकार की नीतियां राज्य के विकास के मार्ग में बाधक बन गयी है और केंद्र की योजनाओं से राज्य के लोग वंचित रखे गये हैं।
श्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार के ठोस और भविष्योन्मुखी कामों से आज वैश्विक उथल पुथल के दौर और युद्ध की परिस्थितियों में भी भारत की नीति और रणनीति देखकर, भारत का सामर्थ्य देखकर दुनिया के अनेकों देश हैरान हैं। दुनिया में जो उथल-पुथल मची है, इन कठोर विपरीत परिस्थितियों में भी भारत प्रगति के, विकास के, विश्वास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘ जब राष्ट्रनीति ही राजनीति का मुख्य आधार हो, तब देश का भविष्य सर्वोपरि होता है। लेकिन जब राजनीति में व्यक्तिगत स्वार्थ हावी हो जाता है, तब लोग देश के फ्यूचर के बजाय अपने फ्यूचर (भविष्य) के बारे में सोचते हैं।”
उन्होंने 2004 -10 के दौर की याद दिलाते हुए कहा, “कांग्रेस सरकार के समय पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों का संकट आया था और तब कांग्रेस ने देश की नहीं बल्कि अपनी सत्ता की चिंता की। उस वक्त कांग्रेस ने एक लाख अड़तालीस हज़ार करोड़ रुपए के ऑयल बॉन्ड जारी किए थे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने खुद कहा था कि वो आने वाली पीढ़ी पर कर्ज का बोझ डाल रहे हैं।”
श्री मोदी ने कहा, ” यह जानते हुए भी कि ऑयल बॉन्ड का फैसला गलत है, जो रिमोट कंट्रोल से सरकार चला रहे थे, उन लोगों ने अपनी सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय किया क्योंकि जवाबदेही उस समय नहीं होनी थी, उस बॉन्ड पर री-पेमेंट 2020 के बाद होनी थी।
प्रधानमंत्री ने कहा, ” …बीते 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस सरकार के उस पाप को धोने का काम किया है, और इस धुलाई का खर्चा कम नहीं आया है, ऐसी लाँड्री आपने देखी नहीं होगी। एक लाख 48 हज़ार करोड़ रुपए की जगह, देश को तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक की पेमेंट करनी पड़ी क्योंकि इसमें ब्याज भी जुड़ गया था।” उन्होंने कहा, ” आजकल कांग्रेस के जो नेता बयानों की मिसाइलें दाग रहे हैं, मिसाइल आई तो टीवी9 को मजा आएगा, उनकी इस विषय का जिक्र आते ही बोलती बंद हो जाती है।”
असम और पश्चिम बंगाल सहित पूर्वी और पूर्वोतर में विकास के लिए अपनी सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “दुर्भाग्य से आज वहां एक ऐसी निर्मम सरकार है, जो विकास पर ब्रेक लगाकर बैठी है।….. बंगाल में आयुष्मान योजना पर निर्मम सरकार ने ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम आवास योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। चाय बागान श्रमिकों के लिए शुरू हुई योजना के लिए ब्रेक लगाया हुआ है। यानी विकास और जनकल्याण से ज्यादा प्राथमिकता निर्मम सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ को दे रही है।”
उन्होंने कहा कि देश में इस तरह की राजनीति की शुरुआत जिस दल ने की है, वो अपने गुनाहों से बच नहीं सकती और वो पार्टी है – कांग्रेस। कांग्रेस पार्टी की राजनीति का एक ही लक्ष्य रहा है, किसी भी तरह विकास का विरोध और कांग्रेस यह तब से कर रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा, ” गुजरात में वर्षों तक जनता ने हमें आशीर्वाद दिया, तो कांग्रेस ने उस जनादेश को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने गुजरात की छवि पर सवाल उठाए, उसकी प्रगति को कटघरे में खड़ा किया और जब यही विश्वास पूरे देश में दिखाई दिया, तो कांग्रेस का विरोध भी रीजनल से नेशनल (क्षेत्रीय से राष्ट्रीय) हो गया।”
उन्होंने कहा, “जब राजनीति में विरोध, विकास के विरोध में बदल जाए, जब आलोचना देश की उपलब्धियों पर सवाल उठाने लगे, तब यह सिर्फ सरकार का विरोध नहीं रह जाता, यह देश की प्रगति से असहज होने की मानसिकता बन जाती है। आज कांग्रेस इसी मानसिकता की गुलाम बन चुकी है।”
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में बनी परिस्थितियों अनेक देशों में तो स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी है।”और इन हालातों में हम देख रहे हैं कि राजनीतिक स्वार्थ से भरे कुछ लोग, कुछ दल, संकट के इस समय में भी अपने लिए राजनीतिक अवसर खोज रहे हैं।” प्रधानमंत्री ने कोरोना काल के महासंकट के समय देशवासियों की एकजुटता का उल्लेख करते हुए कहा, ” इसी भाव के साथ हमें इस युद्ध से बनी परिस्थितियों का सामना करना है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया की हर उथल-पुथल के बीच, भारत ने अपनी प्रगति की गति को भी बनाए रखा है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद, बीते 23 दिनों में उनकी सरकार ने पूरब से पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक देश में हजारों करोड़ की विकास परियोजाओं का काम किया है।
उन्होंने कहा कि युद्ध के इन दिनों में भारत ने संबंध बनाने की क्षमता दिखाई है, निर्णय करने की क्षमता दिखायी है दिखाई है और संकट की परिस्थि को संभालने की क्षमता भी दिखाई है।भारत आज वो देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 5-6 साल में महामारी के बाद चुनौतियां एक के बाद एक बढ़ती ही गई हैं। ऐसा कोई साल नहीं है, जिसने भारत की, भारतीयों की परीक्षा न ली हो। लेकिन 140 करोड़ देशवासियों के एकजुट प्रयास से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है।
श्री मोदी ने कहा कि ऐसे समय जब कि दुनिया इतने सारे खेमों में बंटी हुई है, भारत ने अभूतपूर्व और अकल्पनीय सेतु बनाए हैं। खाड़ी से लेकर पश्चिमी देशों और दक्षिणी गोलार्ध की दुनिया से लेकर पड़ोसी देशों तक भारत सभी का भरोसेमंद भागीदार है। उन्होंने कहा, ‘ कुछ लोग पूछते हैं, हम किसके साथ हैं? तो उनको मेरा जवाब यही है कि हम भारत के साथ हैं, हम भारत के हितों के साथ हैं, शांति के साथ हैं, संवाद के साथ हैं।”
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