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अपनी मर्जी से कहानियां बनाकर छापते थे लोग: सोमी अली

अपनी मर्जी से कहानियां बनाकर छापते थे लोग: सोमी अली

मुंबई, 15 अप्रैल । 90 का दशक में फिल्मी सितारों के बीच की दोस्ती, रिश्ते और कथित झगड़ों को मैगजीन और अखबारों द्वारा बढ़ा-चढ़ाकर या मनगढ़ंत तरीके से पेश किया जाता था। उसी पुराने दौर को याद करते हुए अभिनेत्री सोमी अली ने एक पुराना और दिलचस्प किस्सा साझा किया है। हाल ही में सोमी अली ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक थ्रोबैक पोस्ट साझा करते हुए 90 के दशक की मीडिया संस्कृति पर खुलकर बात की। उन्होंने लिखा, उस समय सोशल मीडिया जैसी कोई चीज नहीं थी, जिससे लोग सेलिब्रिटीज की असली जिंदगी को समझ सकें या उनकी बातों को सीधे सुन सकें। इस वजह से मैगजीन और टैब्लॉइड्स को खुली छूट मिल जाती थी और वे अपनी मर्जी से कहानियां बनाकर छापते थे।
उस दौर में दर्शकों के पास कोई दूसरा विश्वसनीय जरिया नहीं होता था, जिससे वे सच्चाई जान सकें, और इसलिए अक्सर मैगजीन में छपी बातें ही सच मान ली जाती थीं। यह टिप्पणी 90 के दशक के मीडिया परिदृश्य पर एक महत्वपूर्ण प्रकाश डालती है, जब पत्रकारिता की नैतिकता और सेलिब्रिटी गोपनीयता के बीच की रेखा अक्सर धुंधली हो जाती थी। अपनी पोस्ट में सोमी अली ने साल 1993 की एक खास मुलाकात का जिक्र किया, जब उनकी पहली बार अभिनेत्री ज़ेबा बख्तियार से मुलाकात हुई थी। उन्होंने बताया कि किस तरह उस समय की मैगजीन ने उन दोनों के बीच एक अनावश्यक प्रतिस्पर्धा और टकराव की कहानी गढ़ने की कोशिश की थी। सोमी ने स्पष्ट किया, हम दोनों ही पाकिस्तान में जन्मी थीं, लेकिन मेरा पालन-पोषण अमेरिका में हुआ था। शायद इस समानता को आधार बनाकर उस समय की मैगजीन ने हम दोनों के बीच राइवलरी (प्रतिद्वंद्विता) पैदा करने की कोशिश की, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग थी। उनके इस बयान से पता चलता है कि मीडिया कैसे दो अलग-अलग व्यक्तियों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर देता था, केवल कहानियों को मसाला देने के लिए।
सोमी अली ने अपनी पोस्ट में जोर देकर कहा, मैगजीन की यह कोशिश कभी सफल नहीं हो पाई। असल जिंदगी में मेरे और ज़ेबा बख्तियार के बीच कोई राइवलरी नहीं थी, बल्कि हमारे बीच सम्मान और समझ का रिश्ता था। मैं आज भी उस पहली मुलाकात को एक बहुत अच्छे अनुभव के तौर पर याद करती हूं और मेरे मन में ज़ेबा के लिए आज भी काफी इज्जत है। यह बयान उन सभी अफवाहों और मनगढ़ंत कहानियों को खारिज करता है जो उस दौर में फैलाई गई थीं और यह दर्शाता है कि व्यक्तिगत रिश्ते अक्सर मीडिया की सुर्खियों से बहुत अलग होते हैं। सोमी अली ने ज़ेबा बख्तियार की तारीफ करते हुए उनके प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। उन्होंने कहा, वह बेहद खूबसूरत और अच्छी इंसान हैं। मैं हमेशा उनके खुश रहने की कामना करती हूं और उन्हें जिंदगी में हर खुशी मिले, ऐसी मेरी दुआ है।
यह हार्दिक प्रशंसा उनके बीच के सकारात्मक रिश्ते को और मजबूत करती है, जो मीडिया द्वारा गढ़ी गई प्रतिद्वंद्विता से कहीं अधिक गहरा और वास्तविक था। अगर ज़ेबा बख्तियार की बात करें तो उन्होंने साल 1991 में रिलीज हुई फिल्म हिना से भारतीय सिनेमा में अपनी पहचान बनाई थी। यह फिल्म ऋषि कपूर के साथ उनके करियर की सबसे यादगार फिल्मों में से एक है। इस फिल्म में उनके साथ ऋषि कपूर और अश्विनी भावे भी मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म का निर्देशन रणधीर कपूर ने किया था और यह भारत-पाकिस्तान की पृष्ठभूमि पर आधारित एक भावुक प्रेम कहानी थी, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया था।

सियासी मियार की रीपोर्ट