Tuesday , April 21 2026

मैं भूल जाऊं तुम्हे

मैं भूल जाऊं तुम्हे

-जावेद अख्तर-

मैं भूल जाऊं तुम्हे अब यही मुनासिब है,
मगर भुलाना भी चाहूं तो किस तरह भूलूं
कि तुम तो फिर भी हकीकत हो कोई ख्वाब नहीं
यहां तो दिल का ये आलम है, क्या कहूं कमबख्त,
भुला ना पाया ये, वो सिलसिला जो था ही नहीं
वो इक ख़याल जो आवाज़ तक गया ही नहीं
वो एक बात जो मैं कह नहीं सका तुमसे
वो एक रब्त जो हम में कभी रहा ही नहीं
मुझे है याद वो सब जो कभी हुआ ही नहीं।।

सियासी मियार की रीपोर्ट