आर्थिक आंकड़ों में बड़ा बदलाव, वास्तविक जीडीपी गणना में अब पीपीआई डिफ्लेटर
- जून तिमाही से लागू होगी नई गणना प्रणाली; 31 अगस्त को जारी होंगे संशोधित अनुमान

नई दिल्ली, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने भारतीय आर्थिक आंकड़ों की गणना में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। मंत्रालय अब जून तिमाही (वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही) से वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों की गणना के लिए आउटपुट उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) को डिफ्लेटर के तौर पर इस्तेमाल करेगा। यह कदम देश के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक के आकलन के तरीके में एक संरचनात्मक परिवर्तन लाएगा, जिसका उद्देश्य आर्थिक वास्तविकताओं को अधिक सटीक रूप से प्रतिबिंबित करना है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, सांख्यिकी मंत्रालय 31 अगस्त को पिछले वर्षों के लिए संशोधित वास्तविक जीडीपी अनुमान भी जारी करेगा, जिसमें डिफ्लेटर के तौर पर आउटपुट पीपीआई का इस्तेमाल किया जाएगा। इसी दिन वित्त वर्ष 2027 की अप्रैल-जून अवधि के लिए राष्ट्रीय लेखा के आंकड़े भी जारी किए जाएंगे। इस बदलाव का सीधा असर पिछले तीन वित्त वर्षों के आंकड़ों पर पड़ेगा। एक अधिकारी ने बताया, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही का जीडीपी डेटा आउटपुट पीपीआई पर आधारित होगा। वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के लिए जारी अनुमान स्थिर कीमतों पर अनुमान से बदल जाएंगे क्योंकि अब इसमें पीपीआई को शामिल किया जाएगा। संशोधित श्रृंखला अगस्त में आएगी।यह महत्वपूर्ण निर्णय सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा 29 जून को जारी औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों के बाद आया है, जिसमें थोक मूल्य सूचकांक (डबल्यूपीआई) की जगह आउटपुट-पीपीआई का इस्तेमाल डिफ्लेटर के तौर पर किया गया था। इस पृष्ठभूमि में, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने 15 जून को भारत का पहला उत्पादक मूल्य सूचकांक ढांचा जारी किया था, जिसमें आउटपुट पीपीआई, इनपुट पीपीआई और सेवा पीपीआई शामिल हैं।
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