मणिपुर से लेकर यूपी तक के युवा सीख रहे जापानी भाषा, कई राज्यों के उम्मीदवार ले रहे प्रशिक्षण

जापान में बढ़ती वर्कफोर्स की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत-जापान साझेदारी के तहत भारत के युवा जापानी भाषा सीखकर वहां काम करने के मौके तलाश रहे हैं। इस पहल को कौशल विकास मंत्रालय के संगठन नैशनल स्किल डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएसडीसी) ने शुरू किया है और नोएडा के एनएसडीसी इंटरनैशनल सेंटर में उम्मीदवारों को ट्रेनिंग दी जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मणिपुर, मिजोरम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सहित कई राज्यों से उम्मीदवार इस ट्रेनिंग के लिए आ रहे हैं। अब तक 400 से ज्यादा उम्मीदवारों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है, जिनमें से 185 लोग जापान में काम कर रहे हैं। वर्तमान में 100 और उम्मीदवारों की ट्रेनिंग जारी है। बताया जा रहा है कि इस ट्रेनिंग में जापान से भी ट्रेनर शामिल होते हैं।
जापान में क्यों हैं बेहतर अवसर
जापान में बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है और वर्कफोर्स की कमी है। इसे देखते हुए भारतीय युवाओं के लिए हेल्थकेयर, मैन्युफैक्चरिंग, एग्रीकल्चर, कंस्ट्रक्शन और सर्विस सेक्टर में अच्छे अवसर हैं। इसके साथ ही यहां बताते चलें कि पिछले वर्ष अगस्त में भारत और जापान के रणनीतिकारों ने एक संयुक्त विजन तैयार किया था। इसके तहत अगले 5 वर्षों में 5 लाख लोगों के ह्यूमन रिसोर्स एक्सचेंज की योजना बनाई गई, जिसमें 50 हजार भारतीय स्किल्ड प्रोफेशनल जापान जाएंगे। एनएसडीसी के सीईओ अरुण कुमार पिल्लई ने मीडिया से कहा, कि इस पहल से भारतीय युवाओं को इंटरनैशनल करियर बनाने में मदद मिलेगी।
भविष्य की चुनौतियां और सुझाव
विदेशी भाषा सीखने और जॉब दिलाने की यह पहल महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे और व्यापक बनाना जरूरी है। साथ ही यह देखना होगा कि जिनके पास कोर्स करने के पर्याप्त आर्थिक साधन नहीं हैं, उन्हें सस्ते लोन या अन्य मदद के जरिए मुख्य स्ट्रीम में लाया जाए।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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