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आदिवासी कारीगरों की कला को मिलेगा वैश्विक बाजार, केंद्रीय मंत्री जुआल ओराम ने लॉन्च किया ‘RISA’ प्रीमियम ब्रांड, पारंपरिक शिल्प और आधुनिक डिजाइन का होगा अनूठा संगम

आदिवासी कारीगरों की कला को मिलेगा वैश्विक बाजार, केंद्रीय मंत्री जुआल ओराम ने लॉन्च किया ‘RISA’ प्रीमियम ब्रांड, पारंपरिक शिल्प और आधुनिक डिजाइन का होगा अनूठा संगम

नई दिल्ली, 19 मार्च । भारत की समृद्ध और विविध आदिवासी संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने के लिए केंद्रीय आदिवासी मामलों के मंत्री जुआल ओराम ने बुधवार को नई दिल्ली के सुंदर नर्सरी में आयोजित ‘भारत ट्राइब्स फेस्ट’ के दौरान ‘रीसा (RISA) टाइमलेस ट्राइबल’ ब्रांड का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। मंत्री ओराम ने बताया कि ‘RISA’ महज एक ब्रांड नहीं, बल्कि आदिवासी कारीगरों की सदियों पुरानी शिल्पकला को दुनिया के सामने लाने का एक सशक्त माध्यम है। इस पहल के जरिए उन कलाकारों को मजबूती मिलेगी जिनकी कला अब तक बाजारों की पहुंच से दूर थी, जिससे उनकी अद्वितीय रचनात्मकता को वैश्विक पहचान मिलना तय है।

TRIFED के प्रबंध निदेशक एम. राजमुरुगन के अनुसार, RISA ब्रांड को पारंपरिक ज्ञान और समकालीन डिजाइन की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। प्रथम चरण में देश भर के 10 विशिष्ट क्लस्टरों को शामिल किया गया है, जिनमें एरी व मुगा सिल्क, चांगपा पश्मीना, और संथाल कॉटन जैसी प्रतिष्ठित बुनाई के साथ-साथ टोडा कढ़ाई और लोंगपी पॉटरी जैसे अद्वितीय शिल्प शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च-मूल्य वाले बाजारों के लिए कारीगरों की क्षमता निर्माण करना और उनके लिए स्थाई आजीविका के अवसर पैदा करना है। प्रीमियम और इको-फ्रेंडली पैकेजिंग के माध्यम से इन उत्पादों को ग्लोबल फैशन और लाइफस्टाइल के केंद्र में लाने की योजना है।

इस परियोजना के तहत आदिवासी महिलाओं और कारीगरों को सीधे बाजार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। आदिवासी अधिकार विशेषज्ञ डॉ. बिक्रांत तिवारी ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि ‘RISA’ की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह जमीनी स्तर पर रोजगार को कितना मजबूत करता है। मंत्रालय का लक्ष्य डिजाइन इनोवेशन के जरिए लुप्त हो रहे पारंपरिक क्राफ्ट को पुनर्जीवित करना है। यह मॉडल न केवल भारत की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि प्रकृति के साथ जुड़े इन समुदायों को उनकी कला का सही मूल्य और सम्मान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल सके।

सियासी मियार की रीपोर्ट