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अभिनेता विजय की पार्टी TVK का बड़ा एलान: तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी पार्टी, NDA के साथ गठबंधन की अटकलों पर लगाया पूर्ण विराम

अभिनेता विजय की पार्टी TVK का बड़ा एलान: तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी पार्टी, NDA के साथ गठबंधन की अटकलों पर लगाया पूर्ण विराम

चेन्नई, 19 मार्च। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच ‘तमिलगा वेट्री कजगम’ (TVK) के प्रमुख और लोकप्रिय अभिनेता विजय ने सभी राजनीतिक अटकलों को खत्म कर दिया है। चेन्नई के पास मामल्लापुरम में आयोजित एक इफ्तार पार्टी के दौरान विजय ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी। पिछले कई दिनों से यह चर्चा जोरों पर थी कि विजय की पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल हो सकती है और इसके लिए आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण मध्यस्थता कर रहे हैं। हालांकि, विजय ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए घोषणा की है कि उनका एकमात्र गठबंधन राज्य की जनता के साथ है और वे सभी 234 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेंगे।

चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है, जिसके नतीजे 4 मई को आएंगे। विजय ने अपने संबोधन में ‘धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वे अपने वैचारिक रुख से समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सत्ता केवल TVK के नेतृत्व में ही स्थापित होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी को ‘वैचारिक विरोधी’ बताने के बाद एनडीए में शामिल होना विजय के राजनीतिक भविष्य के लिए जोखिम भरा हो सकता था। विजय के इस साहसी फैसले ने अब डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) जैसे पारंपरिक खेमों की चुनावी गणित को उलझा दिया है।

विजय की पार्टी के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले से तमिलनाडु में अब त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। एक ओर मुख्यमंत्री स्टालिन के नेतृत्व वाला ‘सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस’ है, जिसमें कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियाँ शामिल हैं। दूसरी ओर एआईएडीएमके के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन है। ऐसे में TVK की एंट्री ने युवा मतदाताओं और सिनेमा प्रशंसकों के बीच भारी उत्साह पैदा कर दिया है। कांग्रेस ने पहले ही डीएमके के साथ अपनी सीटें पक्की कर ली हैं, लेकिन विजय की बढ़ती लोकप्रियता ने सभी स्थापित दलों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। अब देखना यह होगा कि 4 मई को जनता विजय के इस ‘एकला चलो’ के संकल्प पर क्या मुहर लगाती है।

सियासी मियार की रीपोर्ट